काव्य कूची
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तितली के रंगीन परों सी जीवन में सारे रंग भरे चंचलता उसकी आँखों में चपलता उसकी बातों मे थिरक थिरक क
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Sunday, September 29, 2019
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हौसले परवाज हैं जीवन सागर की लहरों सा हर लहर ,कदम इक साज है, कभी शांत,कभी उथल पुथल, हौसले परवाज हैं.... बाधाओं को हँस कर गले लगात...
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Saturday, September 28, 2019
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गीतिका ***** परहित सदा करते रहे विषपान है, अंतर सरल है नेक वो धनवान है । क्यों आज फैला ये तमस चहुँ ओर है, इसको मिटाना लक्ष्य प्रथ...
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मंथन मुक्तक मंथन का ये विष मुझे अब पीना होगा बिन अमरत्व की चाह अब जीना होगा, तुम गलत कभी हो सकते हो,भला मुझे ही अपने होठों को अब सीन...
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Friday, September 27, 2019
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क्षणिकाएं पोशाक 1) अजर अमर आत्मा बदलती रहती नित नई पोशाक , पोशाक कभी वो शीघ्र क्यों बदलती! 2) एक पोशाक दुखों के छिद्र से भरी ह...
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स्वेद/पसीना ** खेतों में धूप के समंदर में पसीने का दरिया बहाता किसान! पसीना नहीं ,लहू बहता है तब किसान आधा पेट खा कर दूसरों का पेट ...
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सत्य सत्य लिखना कटु ही होता है , झूठ चासनी में पगा होता है। एक कटु सत्य सामने आ खड़ा हो जाता सोच सोच कर जीना दुश्वार किया करता है । ...
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Thursday, September 26, 2019
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ईश्वर चंद्र विद्यासागर ईश्वर चंद्र विद्यासागर बंगाल के प्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षाविद, समाज सुधारक, लेखक ,अनुवादक थे । ऐसे महापुरुष को उ...
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