काव्य कूची
motibhavke.blogspot.com
तितली के रंगीन परों सी जीवन में सारे रंग भरे चंचलता उसकी आँखों में चपलता उसकी बातों मे थिरक थिरक क
(Move to ...)
Home
▼
Monday, September 30, 2019
›
माँ दुर्गा के नौ रूप में जीवन के विभिन्न आयाम *** माँ दुर्गा के नौ रूप है इस जीवन का आधार कल्याणकारिणी देवी करतीं जन जन का उद्धार। शै...
7 comments:
›
*दक्षिणा* 'मॉम पंडित जी का पेमेंट कर दो ' सुन कर इस पीढ़ी के श्रीमुख से संस्कृति कोने में खड़ी कसमसाई थी सभ्यता दम तोड़ती नजर आई ...
2 comments:
Sunday, September 29, 2019
›
हौसले परवाज हैं जीवन सागर की लहरों सा हर लहर ,कदम इक साज है, कभी शांत,कभी उथल पुथल, हौसले परवाज हैं.... बाधाओं को हँस कर गले लगात...
5 comments:
Saturday, September 28, 2019
›
गीतिका ***** परहित सदा करते रहे विषपान है, अंतर सरल है नेक वो धनवान है । क्यों आज फैला ये तमस चहुँ ओर है, इसको मिटाना लक्ष्य प्रथ...
›
मंथन मुक्तक मंथन का ये विष मुझे अब पीना होगा बिन अमरत्व की चाह अब जीना होगा, तुम गलत कभी हो सकते हो,भला मुझे ही अपने होठों को अब सीन...
1 comment:
Friday, September 27, 2019
›
क्षणिकाएं पोशाक 1) अजर अमर आत्मा बदलती रहती नित नई पोशाक , पोशाक कभी वो शीघ्र क्यों बदलती! 2) एक पोशाक दुखों के छिद्र से भरी ह...
4 comments:
›
स्वेद/पसीना ** खेतों में धूप के समंदर में पसीने का दरिया बहाता किसान! पसीना नहीं ,लहू बहता है तब किसान आधा पेट खा कर दूसरों का पेट ...
5 comments:
‹
›
Home
View web version