नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान
नशा धूम्रपान
धुँए के बनते छल्लों में
परिवारों का सपना सोया
पेट काट कर शुल्क चुका जब
आशाओं के केंद्र पले थे
विद्यालय की पोशाकों में
सपना काँधे लिए चले थे
अल्हड़पन की मस्ती में ही
संगी साथी दुर्बल करते
मात-पिता की छीन कमाई
सौ झूठों से जेबें भरते
क्षणिक खुशी में जीवन काला
तन में बीज धूम्र का बोया ।।
पान दुकानों पर भीड़ बड़ी
खून पसीने का धन पानी
शान समझते अँगुलियों की
सभी उम्र की यही कहानी
श्वेत वसन का ओढ़ आवरण
काली मौतें जब बिकती हैं
गरल उतरता तभी रगों में
फुप्फुस में श्वासें रुकती हैं
नीलांबर से धूल चाटता
टूटे पंख पखेरू रोया ।।
राजस्व बढ़ाकर जनता को
वैधानिक नियम सिखाए
लाभ-हानि का भेद बता कर
आदर्शो के वाक्य लिखाए
स्वार्थ लोभ से भरी तिजोरी
सेहत से तब खिलवाड़ किए
बना नशे का आदी जीवन
तिल सम दुख का ताड़ किये
युवा देश का दिशाहीन जो
राख हुआ अरमान पिरोया।।
अनिता सुधीर आख्या
लखनऊ
No comments:
Post a Comment