तितली के रंगीन परों सी जीवन में सारे रंग भरे चंचलता उसकी आँखों में चपलता उसकी बातों मे थिरक थिरक क

Sunday, August 2, 2026

नशा मुक्त भारत

नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान 

नशा धूम्रपान

धुँए के बनते छल्लों में 
परिवारों का सपना सोया

पेट काट कर शुल्क चुका जब
आशाओं के केंद्र पले थे
विद्यालय की पोशाकों में 
सपना काँधे लिए चले थे
अल्हड़पन की मस्ती में ही
संगी साथी दुर्बल करते
मात-पिता की छीन कमाई 
सौ झूठों से जेबें भरते
क्षणिक खुशी में जीवन काला
तन में बीज धूम्र का बोया ।।

पान दुकानों पर भीड़ बड़ी
खून पसीने का धन पानी
शान समझते अँगुलियों की
सभी उम्र की यही कहानी
श्वेत वसन का ओढ़ आवरण
काली मौतें जब बिकती हैं
गरल उतरता तभी रगों में
फुप्फुस में श्वासें रुकती हैं
नीलांबर से धूल चाटता
टूटे पंख पखेरू रोया ।।

राजस्व बढ़ाकर जनता को
वैधानिक नियम सिखाए
लाभ-हानि का भेद बता कर
आदर्शो के वाक्य लिखाए
स्वार्थ लोभ से भरी तिजोरी
सेहत से तब खिलवाड़ किए
बना नशे का आदी जीवन
तिल सम दुख का ताड़ किये
युवा देश का दिशाहीन जो
राख हुआ अरमान पिरोया।।

अनिता सुधीर आख्या 
लखनऊ

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