शिव विवाह
त्रिनेत्र सुशोभित चंद्र ललाट, त्रिशूल लिए कर साज चलें हैं।
विचित्र लगे शिव कंठ भुजंग,बरात पिशाच समाज चले हैं।।
विभूति लगे तन मुंड कपाल,मृदंग लिए सब बाज चले हैं।
विराज रहे तब देव सुजान, विमान सजा अधिराज चलें हैं।।
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...
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