स्वरचित कुछ कहमुक़री
कहमुक़री दिवस विशेष
1)
उसके बिन जग सूना लागे
उससे ही साँसों के धागे
गीत बना जस मन मधुकर
का सखि साजन?ना सखि दिनकर ।
2)
सदा बने मेरी परछाईं
उस बिन होती है कठिनाई
मेरा जीवन उसको अर्पण
का सखि साजन?ना सखि दर्पण।।
3)
क्लांत चित्त को शांत करे जो
पल में धमके नहीं डरे वो
मिली प्रीति की फिर से थपकी
का सखि साजन! ना सखि झपकी।।
4)
बिन उसके अब रहा न जाए
जग में ज्यों अँधियारा छाए
गान करूँ नित उसकी महिमा
का सखि साजन! ना सखि चश्मा।।
5)
वादों का नित जाल बिछाए
उसकी बातों में फँस जाए
बड़ा सयाना कब कुछ देता
का सखि साजन, ना सखि नेता।।
6)
कहाँ मना करने पर माने
नींद खड़ी रहती सिरहाने
हर पल सुनते उसकी खरखर
का सखि साजन,ना सखि मच्छर।।
7)
उसकी माया के बंधन में
निशिदिन बीते ध्यान मनन में
उस पर जीवन है न्यौछावर
का सखि साजन, ना सखि तरुवर।।
8)
रिक्त हृदय विश्वास भरे वो
जीवन में फिर आस भरे वो
तन मन की वह हरता पीड़ा
का सखि साजन, ना सखि क्रीड़ा।।
9)
हाथ पकड़ नित संबल देते
उड़ने को तब अम्बर देते
जब भी थी जीवन की झंझा
का सखि साजन, ना सखि मंझा।।
10)
बाहुपाश में जकड़े जाते,
स्वप्न लोक की सैर कराते।
बिन उसके सूनी है रतिया,
का सखि साजन ,ना सखि तकिया।।
अनिता सुधीर आख्या