जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें
रस्म निभाने
आते उत्सव
घर की चौखट सकुचाए
दुविधा लेकर
खड़ा हुआ मन
स्वागत कैसे कर पाएं
माखन मटकी
देख यशोदा
असली-नकली पहचानें
मिलावटी जब
दूध दही हो
लल्ला को क्या दे खाने
छींके पर
भूख टंगी कहती
स्विगी से ऑर्डर कर आए
संग खेलने
ग्वाल बाल के
मोहन ने आस लगाई
जेन जी/ अल्फा
गोपी ने
मस्ती में रील बनाई
कृष्ण बिना
मैदान अकेले
पग आहट कौन सुनाए।।
आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें
अपनों से ही
युद्ध छिड़ा है
भूले बैठे सब गीता
कर्म-धर्म जब
हीन हुए तो
मानव जीवन है रीता
महासमर ये
अधुना युग का
मुरली ही धैर्य धराए।।
आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें
अनिता सुधीर आख्या