https://youtu.be/mcfFqNAdH80?si=c6hjexJ-8DQ5m28N
काव्य कूची
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Wednesday, October 21, 2026
Wednesday, September 23, 2026
आयुर्वेद दिवस
शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग।
वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।।
शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात।
हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह बात।।
वात पित्त के दोष से,होती व्याधि अपार।
जड़ी बूटियाँ कर रहीं,रोगों का उपचार।।
ऋतुचर्या को ठीक कर,करती रोग निदान।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़े,आयुर्वेद का ज्ञान।।
धन्वन्तरि ऋषि वैद्य को,करते सभी प्रणाम।
चरक चिकित्सा देश की,करे निरोगी धाम।।
Friday, September 4, 2026
आओ कान्हा मन हल्का कर लें
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें
रस्म निभाने
आते उत्सव
घर की चौखट सकुचाए
दुविधा लेकर
खड़ा हुआ मन
स्वागत कैसे कर पाएं
माखन मटकी
देख यशोदा
असली-नकली पहचानें
मिलावटी जब
दूध दही हो
लल्ला को क्या दे खाने
छींके पर
भूख टंगी कहती
स्विगी से ऑर्डर कर आए
संग खेलने
ग्वाल बाल के
मोहन ने आस लगाई
जेन जी/ अल्फा
गोपी ने
मस्ती में रील बनाई
कृष्ण बिना
मैदान अकेले
पग आहट कौन सुनाए।।
आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें
अपनों से ही
युद्ध छिड़ा है
भूले बैठे सब गीता
कर्म-धर्म जब
हीन हुए तो
मानव जीवन है रीता
महासमर ये
अधुना युग का
मुरली ही धैर्य धराए।।
आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें
अनिता सुधीर आख्या
Sunday, August 2, 2026
नशा मुक्त भारत
नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान
नशा धूम्रपान
धुँए के बनते छल्लों में
परिवारों का सपना सोया
पेट काट कर शुल्क चुका जब
आशाओं के केंद्र पले थे
विद्यालय की पोशाकों में
सपना काँधे लिए चले थे
अल्हड़पन की मस्ती में ही
संगी साथी दुर्बल करते
मात-पिता की छीन कमाई
सौ झूठों से जेबें भरते
क्षणिक खुशी में जीवन काला
तन में बीज धूम्र का बोया ।।
पान दुकानों पर भीड़ बड़ी
खून पसीने का धन पानी
शान समझते अँगुलियों की
सभी उम्र की यही कहानी
श्वेत वसन का ओढ़ आवरण
काली मौतें जब बिकती हैं
गरल उतरता तभी रगों में
फुप्फुस में श्वासें रुकती हैं
नीलांबर से धूल चाटता
टूटे पंख पखेरू रोया ।।
राजस्व बढ़ाकर जनता को
वैधानिक नियम सिखाए
लाभ-हानि का भेद बता कर
आदर्शो के वाक्य लिखाए
स्वार्थ लोभ से भरी तिजोरी
सेहत से तब खिलवाड़ किए
बना नशे का आदी जीवन
तिल सम दुख का ताड़ किये
युवा देश का दिशाहीन जो
राख हुआ अरमान पिरोया।।
अनिता सुधीर आख्या
लखनऊ
Monday, July 27, 2026
संसद का अवरोध
संसद में प्रतिदिन की खटपट।
ऊँट बदलता प्रतिक्षण करवट।।
माननीय की देख रहे हठ।
विषय निरर्थक से भरते घट।।
संविधान को लिए हाथ में
मर्यादा का तोड़ रहे तट।।
लोकतंत्र के दम घुटने से
आहत कल की मिलती आहट।।
जनता देखे अपने नायक।
शैतानी करते ये नटखट।।
अनिता सुधीर आख्या
Thursday, July 23, 2026
छात्र आंदोलन जंतर मंतर
युवा शक्तियाँ राष्ट्र संपदा,ये मानें।
भ्रमित खड़ी अवसाद लिए क्यों,ये जानें।।
सही अर्थ क्या आंदोलन का,पहचानें।
पहुँच रहे हैं ऐरे ग़ैरे,भड़काने।।
सेंक रहे सब गर्म तवे पर,दो रोटी।
उजले कपड़े नीयत रखते,जब खोटी।।
समाधान में चिकनी चमड़ी,रख मोटी।।
राजनीति की चौसर खेले,नित गोटी।।
कर के तर्क कुतर्क सभी अब,उकसाएँ।
दोष तंत्र के मिल कर ढूँढ़ें, हल पाएँ।।
छात्र युवा की यदि चिंता है,सुलझाएँ।
युवा शक्ति से देश सुरक्षित,गुण गाएँ।।
अनिता सुधीर आख्या
Tuesday, July 14, 2026
विभाजन
रेख विभाजन के लफड़े।
झेल रहा आँगन झगड़े।।
रहा पृष्ठ पर बँटवारा।
होते सपनों के चिथड़े।।
आजादी ने कीमत दी
लज्जा के उतरे कपड़े।।
सुख-दुख के सब साथी ने
मज़हब के ओढ़े मुखड़े।।
स्वर्ण विहग की पीड़ा में
होते अंतस के टुकड़े।।
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