Sunday, January 23, 2022

वोट

 मैं वोट हूँ,  मैं वोट हूँ 

नीयत में जिसके खोट ,

उसे देता बड़ी चोट  हूँ

मैं वोट हूँ ,मैं वोट हूँ  ।


ये मेरी  है कथा ,पर

आजकल बड़ी व्यथा

जाति धर्म में  बाँट के

प्रलोभनों  की मार से

आरक्षण के धार  से

आरोपों के वार से

अनर्गल  प्रचार से

कर्जमाफी के शगूफे से

कोरोना के आंकड़े से

प्रमाण माँगने से

शवों की गिनती से

जब मुझे गिना जाने लगा

तो मैं  काँपने लगा हूँ 

मैं हाँफने लगा हूँ ।

अस्तित्व होते हुए भी 

शून्यता में खोने लगा हूँ 

मैं वोट हूँ ,मैं वोट हूँ  ।


लोकतंत्र का हथियार हूँ 

मतदाता का अधिकार हूँ 

नेताओं के गले की फाँस हूँ 

ई वी एम  का त्रास हूँ

मतदाता पत्र का अतीत हूँ

नोटा का वर्तमान हूँ

मैं वोट हूँ ,मैं वोट हूँ  ।


नोटा  अब बढ़ रहा है

नेताओं,जरा संभल जाना 

अब मेरी शक्ति बढ़ने लगी है

जनता को बेवकूफ न बना पाओगे 

अब अपने मुँह की खाओगे

राष्ट्रहित  में काम करोगे 

तभी मुझे तुम पाओगे।


मतदाताओं तुमसे कुछ कहना है 

अब चुपचाप नहीं सहना है 

तुम जागरूक हो जाओ

नेताओं के बहकावे  में न आओ

मेरा उपयोग करो 

मतदान करो ,मतदान करो,

मेरी शक्ति पहचानो

मैं लोकतंत्र की शक्ति हूँ

मैं वोट हूँ  ,मैं वोट हूँ ।

©anita_sudhir

Saturday, January 22, 2022

आंकड़े कागजों पर



आँकड़े कागजों पर
खूब फले फूले

बुधिया की आँखों में
टिमटिम आस जली
कोल्हू का बैल बना
निचुड़ा गात खली
कर्ज़े के दैत्य दिए
खूँटी पर झूले।।

गमछे में धूल बाँध
रंग भरे पन्ने
खेतों की मेड़ों पर
लगते हैं गन्ने
झुनझुना है दान का
नाच उठे लूले।।

मतपत्र बने पूँजी
रेवड़ी बाँट कर
फिर बिलखती झोपड़ी
क्यों रही रात भर
जय किसान ब्रह्म वाक्य
की हिलती चूलें।।

अनिता सुधीर

Thursday, January 20, 2022

वेदना


 

अंतरयामी प्रभु सब जानते हैं ।अपने बनाये संसार की दशा देख उनकी वेदना और पीड़ा असहनीय है ,कर्मयोगी प्रभु मानव जाति को स्वयं कल्कि बनने का उपदेश दे रहे हैं।

इस को दिखाने का प्रयास

**

आहत है मन देख के  ,ये कैसा संसार।

कदम कदम पर पाप है,फैला भ्रष्टाचार ।।


नौनिहाल भूखे रहें ,मुझे लगाओ भोग ,

तन उनके ढकते नहीं,स्वर्ण मुझे दें लोग।

संतति मेरी कष्ट  में,उनका जीवन तार 

कदम कदम पर पाप है,फैला भ्रष्टाचार ।।

आहत है मन ...


नहीं सुरक्षित बेटियां ,दुर्योधन का जोर,

भाई अब दुश्मन बने,कंस हुए चहुँ ओर ।

आया कैसा काल ये ,मातु पिता हैं भार,

कदम कदम पर पाप है,फैला भ्रष्टाचार ।।

आहत है मन ...


प्रेम अर्थ समझे नहीं ,कहते राधेश्याम,

होती राधा आज है,गली गली बदनाम।

रहती मन में वासना,करते अत्याचार ,

कदम कदम पर पाप है,फैला भ्रष्टाचार ।।

आहत है मन ...


सुनो भक्तजन ध्यान से ,समझो केशव नाम,

क्या लेकर तू जायगा  ,कर्म करो निष्काम।

स्वयं कल्कि अवतार हो,कर सबका उद्धार,

कदम कदम पर पाप है,फैला भ्रष्टाचार ।।

आहत है मन ...


©anita_sudhir

Tuesday, January 18, 2022

दलबदल



गीत

 दलबदल
 
चुनावों का समय आया।
पुराना दल कहाँ भाया।।

टिकट जब दूर होता है।
भरोसा धैर्य खोता है।।
कहाँ फिर ठीकरा फोड़े।
विधायक को कहाँ तोड़े।।
ठगी जनता भ्रमित सुनती
सभी ने झूठ जो गाया।।
चुनावों का समय आया।
पुराना दल कहाँ भाया।।

लगाती दौड़ सत्ता जब।
मुसीबत में प्रवक्ता तब।।
कहाँ से तर्क वह लाए
कि बेड़ा पार कर पाए।
मची तकरार अपनों में
तुम्हीं ने ही अधिक खाया।।
चुनावों का समय आया।
पुराना दल कहाँ भाया।।

बड़े ही धूर्त बैठे हैं ।
सभी के कथ्य ऐंठे हैं।।
बदलते रंग सब ऐसे।
मरें कब लाज से वैसे।।
कहानी पाँच वर्षों की
अजब यह दलबदल माया।।
चुनावों का समय आया।
पुराना दल कहाँ भाया।।

अनिता सुधीर आख्या























Monday, January 17, 2022

दर्पण

 

हाइकु


हाइकु 

दर्पण

1)

धुंधले बिम्ब

अश्रुपूरित नैन 

दोष दर्पण

2)

वक़्त दर्पण 

संघर्ष प्रतिबिम्ब

कर्म अर्पण ।

3)

बिना प्रकाश

अस्तित्वहीन शीशा

क्यों इतराये ।

4)

शुभचिंतक

दर्पण बन जाते 

राह दिखाते ।

5)

सत्य दर्शन

अन्तर्मन दर्पण 

हो समर्पण


अनिता सुधीर


Thursday, January 13, 2022

मकर संक्रांति



मकर संक्रांति

मकर राशि में सूर्य जब, करें स्नान अरु दान।

उत्सव के इस देश में, संस्कृति बड़ी महान ।।


सुत की मङ्गल कामना, माता करे अपार।

तिल लड्डू को पूज कर,करे सकट त्यौहार।।


मूँगफली गुड़ रेवड़ी,धधक रही अंगार ।

नृत्य भाँगड़ा लोहड़ी,करे शीत पर वार ।।


खिचड़ी पोंगल लोहड़ी, मकर संक्रांति नाम।

नयी फसल तैयार है, झूमें खेत तमाम ।।


रंग बिरंगी उड़ रही ,अब पतंग चहुँ ओर ।

मन पाखी बन उड़ रहा, पकड़े दूजो छोर।।


जीवन झंझावात में ,मंझा रखिये थाम ।

संझा दीपक आरती ,कर्म करें निष्काम ।।


उड़ पतंग ऊँची चली, मंझा को दें ढील।

मंझा झंझा से लड़े ,सदा रहे गतिशील।।


ऋतु परिवर्तन जानिये, नव मधुमास बहार।

पीली सरसों खेत में ,धरा करे शृंगार।।


उर में प्रेम मिठास से, लिखिए पर्व विधान।

संकट के बादल छँटें,आये नव्य विहान।।


अनिता सुधीर आख्या


Tuesday, January 11, 2022

मैं विवेकानंद...




मैं .......विवेकानंद बोल रहा हूँ

मैं बदलता भारत देख रहा हूँ

मैं युवा भारत की आहट सुन रहा  हूँ

मैं ये सोच आनंदित हो रहा हूँ 

   कि तुम

लक्ष्य निर्धारित कर ,कर्म पथ पर बढ़ चले हो

मार्ग में शूल हैं पर निडर चलते चले हो

सर्वस्व न्योछावर करने को तत्पर खड़े

सपनोँ को पूरा करने की ऊँची उड़ान भरे हो


मुझे तुम पर पूरा विश्वास है ,

पर

कभी ये देख काँप जाता हूँ

जब तुम्हें नशे की गिरफ्त में पाता हूँ

नारी का अपमान सहन न कर पाता हूँ

भ्रष्टाचार में लिप्त तुम्हें देख नहीं पाता हूँ

अपशब्द देश के लिये सुन नही पाता हूँ

हिंदी की अवस्था पर घबरा जाता हूँ।

संस्कृति के पतन पर व्यथित हो जाता हूँ



मैं  युवा भारत से आह्वान करता हूँ 

सांस्कृतिक विरासत को सहेज आगे बढ़ो

चरित्र निर्माण,पौरुष में सतत लगे रहो

तुम्हारे नाम पर भी दिवस के नाम  हो

सत्कर्म करो ऐसे, जग मे अमर  रहो

मैं ........विवेकानंद  आह्वान करता हूँ



अनिता सुधीर आख्या

वोट

 मैं वोट हूँ,  मैं वोट हूँ  नीयत में जिसके खोट , उसे देता बड़ी चोट  हूँ मैं वोट हूँ ,मैं वोट हूँ  । ये मेरी  है कथा ,पर आजकल बड़ी व्यथा जाति ध...