चित्रकार की तूलिका,भरे गगन में रंग।
सूर्य उदय की लालिमा,रचती नवल प्रसंग।।
नित्य स्वप्न भी जागते,सूर्योदय के संग।
कनक रश्मियाँ घट लिए,भरे स्वप्न में रंग।।
हठी आज हठी ने ठान लिया है अपने को ही नोच नीति नियम क्यों ताखे पर रख अनुशासन का कभी स्वाद चख मनमानी जब उड़े हवा में घर में रहना सोच किसकी प...
अद्भुत! मनोहारी! अति-प्रशंसनीय सृजन.
ReplyDelete