चित्रकार की तूलिका,भरे गगन में रंग।
सूर्य उदय की लालिमा,रचती नवल प्रसंग।।
नित्य स्वप्न भी जागते,सूर्योदय के संग।
कनक रश्मियाँ घट लिए,भरे स्वप्न में रंग।।
शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग। वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...
अद्भुत! मनोहारी! अति-प्रशंसनीय सृजन.
ReplyDelete