Friday, February 6, 2026

नवगीत

हठी

आज हठी ने ठान लिया है
अपने को ही नोच

नीति नियम क्यों
ताखे पर रख
अनुशासन का 
कभी स्वाद चख

मनमानी जब
उड़े हवा में 
घर में रहना सोच

किसकी पिच पर
कौन खेलता
असमंजस को
न्याय झेलता

कुटिल चाल अब
दौड़े भागे
लिए पैर में मोच

खिड़की से क्यों
कूदे सपने
मन की बातों 
में हों अपने

चिथड़े-चिथड़े
सुख को पाते
नित ही हृदय खरोच

अनिता सुधीर आख्या

आओ कान्हा मन हल्का कर लें

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं  आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए  दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...