Friday, January 5, 2024

अयोध्या

 #SHRIRAMBHAJAN

आज रामलला मंदिर के अक्षत पा कर अभिभूत हूँ

गीत



देख अयोध्या की शोभा को,दीप वर्तिका हर्षायी।

नवल भोर की आस जगाकर,संस्कृति जग में मुस्कायी।।


सदियों ने जब करी तपस्या,दिव्य स्वप्न साकार हुआ।

बाल रूप में प्रिय को पाकर,भावों का अँकवार हुआ।।

रोम-रोम आनंदित हो फिर,बना राम का अनुयायी।।

नवल भोर...


पावन सरयू के घाटों ने,किए भव्यता के दर्शन।

लहर-लहर अब ध्यान लगाए,करे चेतना का चिंतन।।

हुलस-हुलस पग रज छूने को,तटिनी बंधन तज आयी

नवल भोर...


मर्यादित हो युग बदले जब,दूर भागता अँधियारा ।

दो अक्षर से सत्य सनातन,लाए जग में उजियारा।।

नव्य अलौकिक सृष्टि सृजन ने,भारत बगिया महकायी।।

नवल भोर...


अनिता सुधीर आख्या

लखनऊ


चित्र गूगल से साभार


1 comment:

महिला दिवस

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं घुड़कियाँ घर के पुरुष की तर्क लड़ते गोष्ठियों में क्यों सदी रो कर गुजारी अब सभा चर्चा करे यह क्यों पुरु...