Monday, June 8, 2026

प्रियतम

उर द्वारे की सांकल खनकी,धड़कन ने मधु गीत लिखा।
नयनों की आँखमिचोली ने,तुमको मन का मीत लिखा।।

टेढ़ी मेढ़ी राहें मिलतीं,सपनों की पगडंडी में 
कड़ी धूप में साथ खड़े तुम,धैर्य धरा कर शीत लिखा।।

मतभेदों की नैया को भी,तुमने पार लगाया है
उष्ण हुए संबंधों ने फिर,बंधन प्रेम पुनीत लिखा।।

तन के अनुबंधों में ही क्या,प्रेम सदा परिभाषित है
पूर्ण बना कर अंतर्मन को,परिणय शुभ परिणीत लिखा।।

अधरों पर मृदु हास दिए तुम,उर उपवन महकाया है
प्रेम समर्पित जीवन देकर,तुमने हर पल जीत लिखा।।

अनिता सुधीर आख्या 

प्रियतम

उर द्वारे की सांकल खनकी,धड़कन ने मधु गीत लिखा। नयनों की आँखमिचोली ने,तुमको मन का मीत लिखा।। टेढ़ी मेढ़ी राहें मिलतीं,सपनों की पगडंडी में  कड़...