Thursday, July 9, 2026

किताब



मुक्तक 


गुणी जनों ने लिख दिये,कितने सुंदर तथ्य।
कड़ा परिश्रम जानिये,लिखा हुआ जो कथ्य।।
आहुति देते ज्ञान की,बनती एक किताब 
आत्मसात कर तथ्य का,मन में हो सामर्थ्य।।


रही किताबें साथ में,बन कर उत्तम मित्र।
भरें ज्ञान भंडार ये,लिये जगत का इत्र।।
इनका महत्व जान के,पढ़िए नैतिक पाठ 
गीतामानस से सजेसुंदर जीवन चित्र।।


जीवन ऐसा ही रहा,जैसे खुली किताब।
प्रश्नों के फिर क्यों नहीं,अब तक मिले जवाब।।
अर्पण सब कुछ कर दिया,होती जीवन साँझ,
सुलझ न पायी जिंदगी,ओढ़े रही नकाब।।


पुस्तक के ही पृष्ठ में,स्मृतियाँ मीठी शेष ।
प्रेम चिन्ह संचित रखे,विस्मृत नहीँ निमेष।।
वह किताब जब भी पढ़ी,मिलते सुर्ख गुलाब,
खड़े सामने तुम हुए,रखे पुराना भेष ।।


काल आधुनिक हो गया,बात बड़ी गंभीर।
कमी समय की हो गयी ,नहीं बचा अब धीर।।
पढ़ते अधुना यंत्र से,छूते  नहीं किताब ,
समाधान अब ढूँढिये,मन में उठती पीर।।

अनिता सुधीर आख्या 

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किताब

मुक्तक  गुणी जनों ने लिख दिये,कितने सुंदर तथ्य। कड़ा परिश्रम जानिये,लिखा हुआ जो कथ्य।। आहुति देते ज्ञान की,बनती एक किताब  आत्मसात कर तथ्य का,...