चुभन
उर में जब जब पीर उठी,कलम मिटाती रही तपन।
शब्दों ने आगाज किया,भाव दिखाते जब तड़पन।।
हृदय पृष्ठ ऐसे भीगा,फिर भी मन उपवन सूखा
कोई कब यह पूछे है,क्या पृष्ठों को हुई चुभन?
अनिता सुधीर आख्या
मुक्तक गुणी जनों ने लिख दिये,कितने सुंदर तथ्य। कड़ा परिश्रम जानिये,लिखा हुआ जो कथ्य।। आहुति देते ज्ञान की,बनती एक किताब आत्मसात कर तथ्य का,...
वाह! बहुत खूब।
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