प्रीति का नव गीत रच दें आज गाने के लिए।
अब दिवस अठखेलियाँ कर हों सजाने के लिए।।
दौड़ कर ही वक़्त गुजरा,चाह अब विश्राम की
साथ जी लें अब पलों को चैन पाने के लिए।।
अनिता सुधीर आख्या
तीस मई शुभ दिन रहा,लिखा गया इतिहास। समाचार मार्तण्ड ने,जन में भरा हुलास।। पत्रकार निष्पक्ष रह,लड़े बिना तलवार। जन-जन की आवाज बन,ल...
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