Tuesday, July 14, 2026

विभाजन

रेख विभाजन के लफड़े।
झेल रहा आँगन झगड़े।।

रहा पृष्ठ पर बँटवारा।
होते सपनों के चिथड़े।।

आजादी ने कीमत दी
लज्जा के उतरे कपड़े।।

सुख-दुख के सब साथी ने
मज़हब के ओढ़े मुखड़े।।

स्वर्ण विहग की पीड़ा में 
होते अंतस के टुकड़े।।


अनिता सुधीर आख्या 

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