Thursday, November 14, 2019


जेब
कुंडलिया

खाली हो यदि जेब तो ,बिखरे मन की आस।
धन से परि  पूरित रहे  , देती  मन विश्वास ।।
देती मन  विश्वास  , जेब की महिमा न्यारी ।
मिलता है सम्मान ,जेब हो जिसकी  भारी।।
रौनक है त्यौहार    ,जेब से मने  दिवाली।
सत्कर्मों से जेब भर , यहाँ से जाना खाली ।।

©anita_sudhir

Wednesday, November 13, 2019





बचपन
बाल दिवस विशेष

***
दादी बाबा संग नहीं
भाई बहन का चलन नहीं
नाना नानी दूर हैं
और बच्चे...
एकाकी बचपन को मजबूर हैं ।
भौतिक सुविधाओं की होड़ लगी
आगे बढ़ने  की दौड़ है
अधिकार क्षेत्र बदल रहे
कोई  कम क्यों रहे
मम्मी पापा कमाते हैं
क्रेच छोड़ने जाते हैं
शाम को थक कर आते हैं
संग समस्या लाते हैं
बच्चों  खातिर समय नहीं
मोबाइल , गेम थमाते है
बच्चों के लिये कमाते हैं
और बच्चे ...
बचपन खोते जाते हैं ।
आबोहवा अब शुद्ध नहीं
सड़कों पर भीड़ बड़ी
मैदान  खेल के लुप्त हुए
बस्ते का बोझ बढ़ता गया
कैद हो गये चारदीवारी में
न दोस्तों का संग  मिला
बच्चों का ....
बचपन खोता जाता है
बच्चा समय से पहले  ही
बड़ा होता जाता है।
याद करें
अपने बचपन के दिन
दादी के  वो लाड़ के दिन
भाई बहनों संग मस्ती के दिन
दोस्तों संग वो खेल खिलौने के दिन
क्या ऐसा बचपन अब बच्चे पाते हैं
बच्चे ....
अपना बचपन खोते जाते हैं
आओ हम बच्चों का बचपन लौटाएं
स्वयं उनके संग बच्चे बन  जायें
वो बेफिक्री के दिन लौटा दें
बच्चों का बचपन लौटा दें।
©anita_sudhir
http://nisargmagazine.com/?p=1455

Tuesday, November 12, 2019

*बेटी


**
शिक्षा पर अधिकार ,काँधे पर बस्ता डाल,
साथ चले  पग चार ,बेटी को पढ़ाइये ।

नींव सभ्य समाज की,खुशी 'दो'परिवार की,
शिक्षा का महत्व  अब  , बेटी को बताइये।

है राह नहीं आसान,स्वयं  बने पहचान,
बेटे के  समान ही ,  बेटी को भी पालिये  ।

हर क्षेत्र में अग्रणी ,सर्व सम्पन्न और गुणी,
शिक्षा से पायें मंजिलें, कम नहीं आंकिये ।

बुरी नजर न डाल ,कोख में अब न मार ,
ये  हैं सृष्टि का आधार ,बेटी को बचाइये  ।

***
©anita_sudhir

Monday, November 11, 2019


तमस

क्यों पिघल रहा विश्वास
क्यों धूमिल हो रही आस
कैसा फैला ये तमस
चहुँ और त्रास ही त्रास ।

कोने में सिसक रही कातरता से
मानवता जकड़ी गयी दानवता से
राह दुर्गम ,कंटको से है रुकावट
जन जन शिथिल हो गया थकावट से।

संघर्ष कर तू आत्मबल से
जिजीविषा को रख प्रबल
भोर की तू आस रख
सत्य मार्ग पर हो अटल ।

आंधियों मे भी जलता रहे
दीप आस की जलाए जा
मन का तमस दूर कर
उजियारा तू फैलाए जा ।

Sunday, November 10, 2019






नशा
दोहावली

वर्तमान का हाल ये ,फैशन बना शराब।
मातु पिता सँग पी रहे,देते तर्क खराब ।।

दिन भर मजदूरी करें ,पीते शाम शराब ।
पत्नी को फिर पीटते,करते जिगर खराब ।।

देते ये चेतावनी, पीना कहें ख़राब ।
ठेके पर बिकवा रही,शासन स्वयं शराब ।।

सबको  गिरफ्त में लिया ,हुये नशे में चूर ।
जीवन सस्ता हो गया ,हुये सभी से दूर ।।

लोग नशीले  हो रहे ,खाते गुटखा पान ।
नशा मुक्त संसार हो ,ऐसा हो अभियान।।
©anita_sudhir

Saturday, November 9, 2019


बाल गीत
विधान चौपाई छन्द  चार चरण 16 मात्रा
***
देखो सुंदर चिड़िया आई,मुख में दाना भर के लाईं
अपने बच्चों को दाना दे,मन ही मन चिड़िया हरषाई

चुन्नू  मुन्नू गप्पू आओ ,इनके सँग मस्ती कर जाओ,
कितनी चिड़िया डाली पर है ,तुम ये गिन गिन कर बतलाओ।
तीन चार पाँच सात छह दस ,उतरी सब मेरी अँगनायी
चींचीं कर बोली ये चिड़ियां,हमको ये फुलवारी भायी
देखो सुंदर..

कितने कितने दिन में सुनते ,इनकी मीठी मीठी वाणी
कहाँ चली जाती हो तुम सब, कहाँ मिले है दाना पानी ,
पेड़ों पर मेरा घर सुंदर,माँ पंखों का आँचल छायी
माँ जब जब हमको दुलराती,खुशियों से जीवन भर पायी

देखो सुंदर..
खेल 'उड़ी चिड़िया' का खेला,बचपन की यादों का रैला
रहे उड़ाते दिन ये आया,गुम होता चिड़ियों का मेला
लुप्त हुई प्रजाति अब इनकी,क्या ये जीवन की सच्चाई ,
पर्यावरण बचा ले जो हम,ये सब छत पर फिर  मडँराई।
देखो सुंदर..

स्वरचित
अनिता सुधीर

नशा मुक्त भारत

नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान  नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में  परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...