**
तृप्ति क्षुधा धन से कब हो,धनवान करोड़ डकार रहे।
लोभ बढ़ाकर पाप करें, कितना वह पैर पसार रहे।।
जीवन में अँधियार भरे, कुल का नित मान उतार रहे।
भूल गए असली धन को, कब सत्य प्रताप विचार रहे?
अनिता सुधीर आख्या
कुंडलिनी शरीर के सात चक्र कुंडलिनी के चक्र ने,करी समाहित शक्ति। मुद्रा आसन जब करे,जाग्रत होता व्यक्ति।। मूलाधार चक्र चार पंखुड़ी का कमल,रंग...
No comments:
Post a Comment