काव्य कूची
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Saturday, September 20, 2025
सत्य
बोलबाला झूठ का ऐसा बढ़ा जो जा रहा।
सत्यता ने प्रश्न पूछे नित्य रो रो क्यों सहा।।
क्यों उदासी घेरती है प्रश्न ही ये क्यों खड़ा।
झूठ की क्या जीवनी है सत्य वर्षों से अड़ा।।
अनिता सुधीर आख्या
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September 21, 2025 at 12:15 PM
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