सदा क्या गलतियाँ ही दोहराएगा।
मनुज कब हादसों से सीख पाएगा।।
नियम को तोड़ना ही शान समझें जब।
सुरक्षा का उन्हें कब अर्थ आएगा।।
सरल है दोष दूजे पर लगा देना।
स्वयं के खोट मानव कब गिनाएगा।।
तनिक सी चूक में अपने बिछड़ते जब
कमी क्या प्रियजनों की भूल जाएगा।।
सजा जब भ्रष्ट को सरकार देगी तब
सुधरता तंत्र ही जीवन बचाएगा।।
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