Saturday, March 11, 2023

महिलाओं के अधिकार

 


"महिलाओं के अधिकार"

महिलाओं के अधिकार से तात्पर्य ऐसी स्वतंत्रता से है जो व्यक्तिगत बेहतरी के लिये तथा सम्पूर्ण समुदाय की भलाई के लिये आवश्यक है।
प्रत्येक महिला या बालिका का समाज में जन्मसिद्ध अधिकार है।  न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के तहत व
मानवीय दृष्टिकोण से ये नितांत आवश्यक है कि महिलाओं को पूर्ण संरक्षण प्रदान करे व उन्हें स्वयं के निर्णय लेते हुए जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो।
महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कर रही हैं। जमीन से लेकर आसमान में ही नहीं, अंतरिक्ष में भी उनके कदमों की छाप मौजूद है ।जिस तरह से उनका कद बढ़ा है तो उन्हें अपने हक और उससे जुड़े कानूनों के बारे में भी जानना अति आवश्यक है ।महिलाओं के प्रति सबकी सोच और नजरिए में पिछले कुछ दशकों में गजब का सकारात्मक बदलाव आया है ,पर इन बदलावों का मतलब यह नहीं कि पुरुष और महिलाएं बराबरी पर पहुंच गए हैं। समानता की यह लड़ाई अभी काफी लंबी चलनी है ।दुनिया के कई देशों में आज भी महिलाएं अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं ।इसमें अपना देश भारत भी है और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अधिकांश महिलाएं अपने अधिकारों और हक के बारे में सही तरीके से जानती ही नहीं है।
भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही नारी का स्थान सम्मानीय रहा है । जिस कुल में स्त्रियों की पूजा होती है वहां पर देवता प्रसन्न होते हैं।ऐसा हमारे शास्त्रों में वर्णित हैं।भारतीय संस्कृति के प्रारंभ में नारी  ही है ।उन दिनों परिवार में मातृ सत्ता ही होती थी। खेती की शुरुआत तथा एक जगह बस्ती बनाकर रहने की शुरुआत नारी ने ही की थी ।
  आर्यों की सभ्यता और संस्कृति के काल में नारी की स्थिति बहुत मजबूत थी। ऋग्वेद काल में भी  नारी सर्वोच्च शिक्षा ग्रहण करती थी। सरस्वती को वाणी की देवी माना गया है। अर्धनारीश्वर की कल्पना स्त्री और पुरुष के समान अधिकार और उनके संतुलित संबंधों का परिचायक है।
कालांतर में धीरे-धीरे सामाजिक व्यवस्था पितृ सत्तात्मक हो गई और नारी हाशिए पर चली गई ।
मध्ययुगीन काल में महिलाओं की स्थिति में अधिक गिरावट आई ।भारत के समुदायों में सती प्रथा, बाल विवाह जैसी प्रथाओं और विधवा पुनर्विवाह पर रोक
सामाजिक जिंदगी का हिस्सा बन गई थी । मुसलमानों की जीत ने पर्दा प्रथा को भारतीय समाज का अंग बना दिया ।राजपूतों ने जौहर की प्रथा आरंभ की । भारत के कुछ हिस्सों में देवदासियों को यौन शोषण का भी शिकार होना पड़ा था ।बहु विवाह की प्रथा हिंदू क्षत्रिय शासकों में व्यापक रूप  से प्रचलित थी ।महिलाएं जनाना क्षेत्र तक ही सीमित थी ।
अंग्रेजी शासन के समय राजा राममोहन राय के प्रयास से सती प्रथा का उन्मूलन हुआ ,और ईश्वर चंद विद्यासागर ने विधवाओं की स्थिति को सुधारने में बहुत प्रयास किए ।उनके संघर्ष का परिणाम विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1956 के रूप में सामने आया ।
1929 में मोहम्मद जिन्ना के प्रयासों के बाद बाल विवाह निषेध नियम पारित किया गया और न्यूनतम विवाह की उम्र 14 वर्ष की गई ।इसका उद्देश्य महिलाओं की स्थिति  में सुधार करना ही था ।
भारत में नारीवादी  सक्रियता ने 1970 के दशक में रफ्तार पकड़ी ।मथुरा बलात्कार केस में काफी विरोध प्रदर्शन हुआ था ।भारतीय दंड संहिता को संशोधित करने और हिरासत में लेने के लिए मजबूर किया गया ।महिला कार्यकर्ता लिंगभेद ,महिला स्वास्थ्य और महिला साक्षरता दर जैसे मुद्दे पर एकजुट हुईं ।
भारतीय समाज में शराब की लत को को अक्सर महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जोड़कर देखा जाता है ।शराब विरोधी कानून 1990 के दशक  में लागू हुआ। एनजीओ के गठन और  राष्ट्रीय महिला आयोग ने भारत में महिलाओं के अधिकारों के लिए एक प्रमुख भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय महिला आयोग भारतीय संसद द्वारा 1990 में पारित अधिनियम के तहत जनवरी 1992 में गठित एक सांविधिक निकाय है। यह कैसी इकाई है जो शिकायत या स्वतः संज्ञान के आधार पर महिलाओं के संवैधानिक हितों और उनके लिए कानूनी सुरक्षा उपायों को लागू करती है। राष्ट्रीय महिला आयोग का उद्देश्य भारत में महिलाओं के अधिकारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए और उनके मुद्दों और चिंताओं के लिए एक आवाज प्रदान करना है। आयोग ने अपने अभियान में प्रमुखता के साथ दहेज, राजनीति ,धर्म और नौकरियों में महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व तथा श्रम के लिए महिलाओं के शोषण को शामिल किया है ।महिलाओं के खिलाफ पुलिस दमन और गाली गलौज को भी गंभीरता से लिया है। बलात्कार पीड़ित महिलाओं के राहत और पुनर्वास के लिए बनने वाले कानून में राष्ट्रीय महिला आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है ।अप्रवासी भारतीय पतियों के जुल्मों और धोखे की शिकार या परित्यक्ता महिलाओं को कानूनी सलाह देने के लिए आयोग की भूमिका भी अत्यंत सराहनीय रही है।
भारत सरकार ने 2001 को महिलाओं को सशक्तिकरण वर्ष के रूप में घोषित किया ।
राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण नीति एक विराट अवधारणा है जिसमें महिलाओं से संबंधित संवैधानिक व्यवस्थाओं को समाज में वास्तविक रूप से परिलक्षित करवाना है।
भारतीय संविधान में महिलाओं को पूर्ण संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गयी है ।महिलाओं के मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 21 व 22 व 22 में वर्णित है ।
सभी भारतीय महिलाओं का समान अधिकार अनुच्छेद 14 में ,
राज्य द्वारा कोई भेदभाव नहीं करना अनुच्छेद 15, अवसर की समानता अनुच्छेद 16 और
समान कार्य के लिए समान वेतन की  गारंटी देता है। अनुच्छेद 15 महिलाओं की गरिमा के लिए अपमानजनक प्रथाओं को परित्याग करने को करने को कहता है ।
शोषण के विरुद्ध अधिकारों का उल्लेख अनुच्छेद 23 व 24 में है।
महिलाओं के सांस्कृतिक व शैक्षणिक अधिकार अनुच्छेद 29, 30 ,39.1, 42 में है है ।इसी क्रम में महिलाओं की सुरक्षा हेतु घरेलू aहिंसा, संपत्ति ,दहेज निषेध कानूनों का निर्माण किया गया है ।इन सब के साथ ही समान नागरिक संहिता के तहत महिलाओं को सुरक्षा प्राप्त है ।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए वास्तविक जीवन में काम आने वाले कानून
1)घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 यौन उत्पीड़न अधिनियम:
यह अधिनियम मुख्य रूप से पति ,पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्ते द्वारा एक पत्नी ,एक महिला लिव इन पार्टनर या फिर घर में किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की  गई घरेलू हिंसा से सुरक्षा के लिए बनाया गया है। महिला या उसकी तरफ से कोई भी यह शिकायत दर्ज कर सकता है।
2) पीसीपीएनडीटी एक्ट :
इस एक्ट के तहत भारत के हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह एक महिला को उसके मूल अधिकार -जीने के अधिकार का अनुभव करने दे। गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक लिंग चयन पढ़ रोक तथा कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है।
3)समान वेतन अधिनियम 1976:
इस अधिनियम के अनुसार - वेतन या मजदूरी को  लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता । समान वेतन पर महिला और पुरुष का समान अधिकार है।
4) हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम :
भारत के कानून में किसी भी महिला को अपने पिता की पुश्तैनी संपत्ति में पूरा अधिकार है।
5)रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार:
आम जीवन में महिलाओं के अधिकार के लिये
अपराधिक प्रक्रिया संहिता सेक्शन 46 के तहत एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
6) गोपनीयता का अधिकार:
यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को अपने नाम की गोपनीयता बनाए रखने का पूरा अधिकार है । अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है।
7)गरिमा और शालीनता का अधिकार:
किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है तो उस पर की जाने वाली की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की मौजूदगी में की जानी चाहिए।
8) मुफ्त कानूनी मदद के लिये अधिकार:
रेप की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का अधिकार है।
  स्टेशन हाउस ऑफिसर के लिए ये जरूरी है कि वो  विधिक सेवा प्राधिकरण को वकील की व्यवस्था के लिए सूचित करें ।
9) मातृत्व संबंधी लाभ के लिए अधिकार :
मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिए सिर्फ संविधान नहीं बल्कि यह उनका अधिकार है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत एक नई मां के प्रसव के बाद महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाती है और वह अपना काम फिर से शुरू कर सकती है।
10) कानूनी रूप से अलग होने के बाद पति की हैसियत के हिसाब से महिला को गुजारा भत्ते का हक है ।
11) अपनी भाषा शैली और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार भी महिलाओं को मिला हुआ है
12)शिक्षा का अधिकार:
यह अधिकार सभी बच्चों विशेषकर बालिकाओं के लिए मुफ्त व अनिवार्य प्राथमिक ,माध्यमिक और उच्च शिक्षा का प्रावधान देता है ।यह उन सभी महिलाओं को मूल शिक्षा का अधिकार देता है जिन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं की है। बिना भेदभाव के शिक्षण संस्थान में भी प्रवेश लेने का अधिकार  महिलाओं को देता है । धर्म, वंश जाति और भाषा के आधार पर  महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
9 मार्च 2010 को राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल को पारित किया गया जिसे संसद और राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए 35% आरक्षण की व्यवस्था है।
जिस समाज में सक्षम पुत्र को भी माता के नाम से जाना जाता था  जैसे अर्जुन को कौन्तेय ,वहाँ आज की परिस्थिति में महिलाओं के ऊपर  बढ़ते व्यभिचार और अत्याचार बड़े ही निंदनीय है ।
ये विचार करने का प्रश्न है कि महिलाएं अपनी हकों की लड़ाई क्यों नहीं लड़ पाती  हैं ।
महिला  खुद को बड़े कदम उठाने के लिए अपने आप को सक्षम नहीं पाती हैं।
शिक्षा और  जानकारी का अभाव भी एक महत्वपूर्ण कारण है। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया इतनी जटिल है और इतना समय लेती है कि महिलाएं अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा पाती हैं ।
लोक लाज और समाज का डर भी एक महत्वपूर्ण कारण है ।
महिलाएं अपनी पुरानी सोच से उबर नहीं पाई है।
संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि सिर्फ कानूनों के निर्माण से ही नारी की सुरक्षा संभव नहीं है ।एक संपूर्ण सुरक्षित वातावरण के निर्माण हेतु हमें अपने घर से ही शुरुआत करनी पड़ेगी और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना पड़ेगा। न्याय की प्रक्रिया को तेज करते हुए करते हुए यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि बालिकाओं के अधिकार व महिलाओं के हितों की सुरक्षा हेतु अविलंब कार्रवाई प्रत्येक स्तर पर अविलंब हो ।
नारी ने स्वयं को ही पुरुषों से कम आँक लिया है ।अपने विचार में ये परिवर्तन लाना है कि वो सृजनकारी है,यदि वो पुष्प की तरह कोमल है तो  चट्टान की तरह अडिग है,और सजग रहते हुए नारी का वो प्राचीन सम्मान फिर से प्राप्त करना है ।


अनिता सुधीर आख्या


Friday, March 10, 2023

नारी

 नारी


ये मूक खामोश औरतें

ख्वाहिशों का बोझ ढोते-ढोते

सदियों से वर्जनाओं में जकड़ी 

परम्पराओं और रुढियों 

की बेड़ियों मे बंधी 

नित नए इम्तिहान से गुजरती

हर पल  कसौटियों पर परखी जाती ..

पुरुषों के हाथ का खिलौना बन 

बड़े प्यार से अपनों से ही छली जाती ..

बिना अपने पैरों पर खड़े 

बिना रीढ़ की हड्डी के,

ये अपने पंख पसारती ..

कंधे से कंधा मिला कर चलती 

सभी जिम्मेदारियाँ निभाती 

खामोशी से सब सह जाती

आसमान से तारे तोड़ लाने 

की हिम्मत रखती है

तभी नारी वीरांगना कहलाती है ।

ये क्या एक दिन की मोहताज है..

नारी !गलती  तो तुम्हारी है 

बराबरी का अधिकार माँग 

स्वयं को तुम क्यों कम आँकती ..

तुम पुरुष से श्रेष्ठ हो

बाहुबल मे कम हो भले 

बुद्धि ,कौशल ,सहनशीलता 

में श्रेष्ठ हो तुम

अद्भुत अनंत विस्तार है तुम्हारा 

पुष्प  सी कोमल हो 

चट्टान सी कठोर हो 

माँ  की लोरी ,त्याग  ममता में हो 

बहन के प्यार में हो 

पायल की झंकार में हो

बेटी के मनुहार में हो ..

नारी !नर तुमसे है 

सृजनकारी हो तुम 

अनुपम कृति हो तुम..

आत्मविश्वास से भरी 

अविरल निर्मल हो तुम ..

चंचल चपला मंगलदायिनी हो तुम

नारी !वीरांगना हो तुम।



अनिता सुधीर आख्या

Saturday, February 18, 2023

शिवरात्रि



महापर्व शिवरात्रि की अनंत शुभकामनाएं


महापर्व शिवरात्रि में,मिलन शक्ति-अध्यात्म का।

कृष्ण चतुर्दश फाल्गुनी, प्रकृति-पुरुष एकात्म का।।


पंच तत्त्व का संतुलन,यह शिवत्व आधार है।

वैरागी को साधना, ही जीवन का सार है।। 


प्रकटोसव शिवरात्रि में, ऊर्जा का संचार है।

द्वादश ज्योतिर्लिंग में, निराकार साकार है।।


शिव गौरा के ब्याह की, आज मनोरम रात में।

आराधन में लीन हो, भीगें भक्ति-प्रपात में।।


सृष्टि रचयिता रुद्र का, तीन लोक अधिपत्य है।

महाकाल हैं काल के, शिवं सुंदरं सत्य है।।


औगढ़ योगीराज का, आदि अंत अज्ञात है।

तांडव नृत्य त्रिनेत्र का, सकल अर्थ विख्यात है।।


आत्मजागरण पर्व की, महिमा अपरंपार है।

नीलकंठ के अर्थ में, जगत श्रेष्ठ व्यवहार है।।


शंकर-गौरा साथ में, और भाव वैराग्य भी।

गुण विरोध में संतुलन, यही मनुज सौभाग्य भी।।


नाड़ी तीन प्रतीक हैं, शंकर हस्त त्रिशूल के।

दैहिक भौतिक ताप हर, निष्कंटक जग मूल में।।


राख चिता की गात जो,भस्म जीव का साथ है।

भाव शुद्धता का लिए, बाबा भोलेनाथ हैं।।


बिल्वपत्र अक्षत चढ़ा,करिए व्रत उपवास सब।

कैलाशी को पूज कर, जीवन करें प्रभास सब।।



अनिता सुधीर आख्या


Tuesday, February 14, 2023

पुलवामा

घात लगाकर दे गए,आतंकी आघात।
चार वर्ष अब बीतते,ह्रदय व्यथित दिन रात।।

ओढ़ तिरंगा सो गए,पुलवामा के वीर।
दृग नम उनकी याद में, द्रवित करे यह बात।।

व्यर्थ न होगा साथियों,ये अनमिट बलिदान।
वादा करते हम सभी  ,अरि को देंगे मात ।।

कोटि-कोटि उनको नमन,जिनके तुम हो लाल।
अर्पित श्रद्धा के सुमन, तुमसे नवल प्रभात।।

परिभाषित कर प्रेम को,गाथा लिखी महान ।
प्रेम-दिवस अब है अमर, तुमसे ही विख्यात ।।

अनिता सुधीर आख्या

Sunday, January 29, 2023

रामचरित मानस

राम चरित मानस

दुर्मिल सवैया छंद  
आठ सगणों (।।ऽ) 
 
**।।१।।
अति लोक लुभावन मानस है,प्रभु राम चरित्र रचे तुलसी।
वह घाट बनारस पावन है,गुणगान सचित्र रचे तुलसी।।
जब मार्ग दिखा हनुमान चले,शुभ ग्रंथ पवित्र रचे तुलसी।
पट द्वार खुले जब मंदिर के,हिय शंकर मित्र कहे तुलसी।।

**।।२।।

तुलसी कृत पावन *मानस* में, जनमानस नायक राम लला।
अवतार लिए हरि विष्णु प्रभो,सरयू सुखदायक राम लला।।
रघुनंदन नाथ सियापति जी,रघुवंश सहायक राम लला।।
जगपालक कोटि प्रणाम तुम्हें,भव कष्ट विनाशक राम लला।।

अनिता सुधीर आख्या

Sunday, January 22, 2023

उत्तर प्रदेश की नदियां


उल्लाला छंद

नदी

भूतल पर जलधार का,स्त्रोत झील हिमनद रहे।
सरिता तटिनी शैलजा,नदी नद्य इसको कहे।।

नदियाँ जीवन दायिनी,जल जीवन आधार है।
मातु सरिस सब पूजते,ये संस्कृति का सार है।।

कहीं जन्म ले बह चली,नीर जलधि में भर रही।
विकसित होती सभ्यता,लालन पालन कर रही।।I

रूप सदानीरा रहे,या बरसाती रूप हो।
अविरल अविरामी चलें,भरा धरा का कूप हो।।

*उत्तर प्रदेश की नदी*


धार्मिक महत्व को रखें,उत्तर प्रदेश की नदी।
ग्रंथों में गाथा लिखे ,बीत गयी कितनी सदी।।

गंगा यमुना गोमती,नदी प्रमुख है शारदा ।
चम्बल वरुणा घाघरा,सभी मिटातीं आपदा।।


*गंगा*

प्रमुख नदी है देश की,गोमुख उद्गम जानिए।
पंच प्रयागों से बनीं,पावन गंगा मानिए।।

आकर फिर ऋषिकेश में,चलतीं हरि के द्वार अब।
गढ़मुक्तेश्वर कानपुर,चलीं इलाहाबाद तब।।

यमुना से संगम किये,स्वागत काशी घाट में।
मिले मोक्ष का द्वार फिर,भव बंधन की काट में।।

खाड़ी है बंगाल की,सुंदरवन डेल्टा रहा।
कपिल संत का धाम है,तीर्थ गंग सागर कहा।।

देवनदी शुभ गंग को,रखें स्वच्छ हम आप सब।
औषधि गुण भंडार से,करना है उपचार अब।।

*यमुना*


नदी सहायक गंग की,व्रज की यमुना जानिए।
उद्गम यमुनोत्री रहा, संगम गंगा मानिए ।

सूर्य देव की नंदिनी,मृत्यु देव् यम भ्रात हैं।
कालिंदी तन मन बसीं ,व्रजवासी की मातु हैं।।

दिल्ली मथुरा आगरा,नगरों को पावन किया ।
क्षेत्र इटावा कालपी,जल जीवन इनको दिया।। 

नहीं प्रदूषित कीजिये,ये कृषि का आधार है।
विकसित जल परियोजना,औद्योगिक विस्तार है।।

वल्लभ मार्गी लिख रहे,यमुना के गुणगान अब ।
घर घर गूँजे कृष्ण फिर, गाथा नदी महान अब।।


*गोमती*

वशिष्ठ महर्षि की सुता, वेद पुराणों ने कहा।
पापनाशिनी गोमती,मूल तत्व आस्था रहा।।

उद्गम पीलीभीत में,कैथी में गंगा मिली।
कितने कंटक मार्ग में,अविरल अविरामी चली।।

रावण वध का पाप था,स्नान किये प्रभु राम तब।
मुक्ति मिली थी पाप से,धनुष किये थे शुद्ध जब।।

मान *धोपाप* का बड़ा ,गंग दशहरा जानिए।
स्न्नान ध्यान करिये यहाँ,शुभ फलदायक मानिए।।


*रामगंगा*

नदी सहायक गंग की,नाम रामगंगा कहे।
गैरसैण तहसील में,दूधातोली से बहे।।

चली कुमायूँ क्षेत्र से,दक्षिण पश्चिम ओर अब।
खड़ोगार आकर मिली,दूनागिरि के छोर तब।।

देवगाड़ से नीर ले,जिम कार्बट उद्यान में।
जिला बिजनौर से चली,पहुँची फिर मैदान में।।

बाँध नदी पर बन गया,पनबिजली उत्पाद है।
खोह नदी संगम हुआ,जिला मुरादाबाद है।।

आकर के कन्नौज में,नदी गंग से आ मिली।
जलविद्युत परियोजना,से सिंचाई कर चली।।

*शारदा*

नदी महाकाली कहें,मैदानों में शारदा।
कालापानी स्थान से,चली मिटाने आपदा।।

मंदिर काली मातु का,लिपू लीख दर्रा रहा।
देवि नाम पर नाम रख,फिर काली गंगा कहा।।

हिन्द और नेपाल की,सीमा चिन्हित कर रही।
बाँध टनकपुर योजना,जल सिंचाई भर रही।।

नया नाम सरयू पड़ा,बहराइच में लोग अब ।
बलिया में गंगा मिली,उत्तम फल का भोग अब।।

बहराइच में नाम अब ,सरिता सरयू जानते।
बलिया में गंगा मिली,द्वार मोक्ष का मानते ।।

*सरयू*

वेदों में उल्लेख है,नदिया ये प्राचीन है।
नगर प्रभो का है बसा,सभी भक्ति में लीन हैं।।

बहराइच से नाम ले,रामप्रिया सरयू कहे ।
मोक्षदायिनी ये नदी,नगर अयोध्या में बहे।।

पतित पावनी घाघरा,इसका दूजा नाम है।
प्रभो विष्णु के नेत्र से,निकला पावन धाम है।।

पाप मिटाती ये नदी,ऐसा कहते लोग हैं।
स्नान दान जप तप करें,उत्तम जीवन भोग है।।

प्रमुख सहायक रापती,गोरखपुर तक बह चली।
संगम गंडक से हुआ ,छपरा में गंगा मिली।।

*चंबल नदी*

बारहमासी शैलजा,उद्गम जानापाव है।
चम्बल नदिया बह चली,यमुना इसका ठाव है।।

कोटा राजस्थान से,मन्दसौर रतलाम को।
भिंड मुरैना को चली,पाँच नदी के धाम को।।

जलप्रपात चूलिया बना,तीन प्रदेशों से बहे।
गाँधी सागर बाँध है,कामधेनु इसको कहे।।

चम्बल मामा शकुनि का,खेल यहाँ चौसर हुआ।
प्रथम नदी शापित रही,इसे न कोई फिर छुआ।।

नीर स्वच्छ बीहड़ नदी,जनसंख्या कम है यहाँ।
मुक्त प्रदूषण से रही,इतिहास अद्भुत वहाँ।।


*प्रदूषण*

नदी प्रदूषित मत करें,यह जीवन आधार है।
धोते हैं क्यों पाप सब,स्वच्छ नीर अधिकार है।।

माटी को  बाँधे जड़ें, रोके मृदा कटाव को।
स्वच्छ नदी की तलहटी,रोके बाढ़ बहाव को ।।

बाढ़ और सूखा बने ,जीवन में अभिशाप जब।
कहे नदी की धार फिर ,जतन करो मिल आप सब।।

करें समापन लेख का,उत्तम अनुभव ये रहा।
जीवटता संदेश दे,गति को ही जीवन कहा ।।


अनिता सुधीर आख्या









Sunday, January 15, 2023

मकर सक्रांति

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं

प्रथम पर्व यह वर्ष का,खत्म हुआ खर मास।
तेजोमय हों सूर्य सम,लगी देव से आस।।

संवत के पंचाग में,हिंदू तिथि आधार।
मकर राशि दिनकर चले,आये तब त्यौहार।।
दक्षिण से उत्तर चले, सूर्य देव भगवान।
पुण्य काल आराधना,करिये जप तप दान।।
बीजमंत्र है सूर्य का,मकर संक्रांति खास।
तेजोमय हों ..

परम्परा के पर्व में रहे एकता सार।
माघी पोंगल लोहड़ी,खुशियों के उद्गार।।
कल्प वास की है प्रथा,उमड़ा जन सैलाब।
भारत संस्कृति श्रेष्ठतम,इसका नहीं जवाब।।
खिचड़ी पापड़ रेवड़ी,तिल गुड़ भरे मिठास।
तेजोमय हों ...

नई फसल अब कट रही,कृषकों का आभार।
भरा रहे धन धान्य से, सदा अन्न भंडार।।
मन पतंग बन उड़ चले, थाम हृदय की डोर।
सकरात्मक ऊर्जा लिए,नवल सुखद हो भोर।।
ऋतु परिवर्तन जान कर,भरता मन उल्लास।
तेजोमय हों ....


अनिता सुधीर आख्या

आयुर्वेद दिवस

शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग।  वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...