गोविंद
भाद्र मास की अष्टमी, कृष्ण लिए अवतार।
अद्भुत लीला श्याम की, खुलते कारा द्वार।।
खुलते कारा द्वार, चले तात शिशु को लिए।
यमुना नीर अपार, शेषनाग छाया किए।।
रास रचैया गोकुल आए।
पालनहारे कष्ट मिटाए।।
नवगीत *बँटवारा* तुलसी चौरा व्यथित देखता श्लोक मंत्र के पहर गए बूढ़ा बरगद बैठा द्वारे टुकुर-टुकुर देखे अँगना पात-पात जब शाख बाँटते फिर रोता मा...
पालनहारे कष्ट मिटाए। वाह वाह
ReplyDelete