गोविंद
भाद्र मास की अष्टमी, कृष्ण लिए अवतार।
अद्भुत लीला श्याम की, खुलते कारा द्वार।।
खुलते कारा द्वार, चले तात शिशु को लिए।
यमुना नीर अपार, शेषनाग छाया किए।।
रास रचैया गोकुल आए।
पालनहारे कष्ट मिटाए।।
शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग। वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...
पालनहारे कष्ट मिटाए। वाह वाह
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