संसद में प्रतिदिन की खटपट।
ऊँट बदलता प्रतिक्षण करवट।।
माननीय की देख रहे हठ।
विषय निरर्थक से भरते घट।।
संविधान को लिए हाथ में
मर्यादा का तोड़ रहे तट।।
लोकतंत्र के दम घुटने से
आहत कल की मिलती आहट।।
जनता देखे अपने नायक।
शैतानी करते ये नटखट।।
अनिता सुधीर आख्या
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