Monday, October 11, 2021

स्कन्द माता

 स्कन्द माता के चरणों में पुष्प


पंचम तिथि माँ स्कंद का,पूजन नियम विधान है।

भक्तों का उद्धार कर , करतीं कष्ट निदान हैं।।


तारकसुर ब्रह्मा जपे, माँग लिए वरदान में।

अजर अमर जीवित रहूँ,मृत्यु न रहे विधान में।।


संभव ये होता नहीं,जन्म मरण तय जानिए।

शिव सुत हाथों मोक्ष हो,मिले मूढ़ को दान ये।।


मूर्ति वात्सल्य की सजे,कार्तिकेय प्रभु गोद में।

संतति के कल्याण में,जीवन फिर आमोद में।।


सिंह सवारी मातु की,चतुर्भुजी की भव्यता।

शुभ्र वर्ण पद्मासना,परम शांति की दिव्यता।।


जीवन के संग्राम में,सेनापति खुद आप हैं।

मातु सिखाती सीख ये, बुरे कर्म से पाप हैं।।


ध्यान वृत्ति एकाग्र कर,शुद्ध चेतना रूप से।

पाएं पुष्कल पुण्य को,पार  लगे भवकूप से।।


Sunday, October 10, 2021

माँ कुष्मांडा

माँ कुष्मांडा के चरणों में श्रद्धा के पुष्प


माँ कुष्मांडा पूजते, चौथे दिन नवरात्रि के।
वंदन बारम्बार है, चरणों में बल दात्रि के।।

अंधकार चहुँ ओर था, रूप लिया कुष्माण्ड का ।
ऊष्मा के फिर अंश से, सृजन किया ब्रह्मांड का।।

अष्ट भुजी देवी लिए, माला निधि की हाथ में।
अमृत कलश की सिद्धियाँ, सदा सहायक क्वाथ में।।

शक्ति मिले संकल्प की, चक्र अनाहत ध्यान से।
रहे प्रकाशित दस दिशा, यश समृद्धि सम्मान से।।

ओज तेजमय पुंज का, सूर्य लोक में धाम है ।
सकल जगत की स्वामिनी, शत शत तुम्हें प्रणाम है।।

अनिता सुधीर आख्या




Saturday, October 9, 2021

माँ चंद्रघंटा

माँ चंद्र घण्टा के चरणों में पुष्प


नवरातों त्योहार में, दिवस तीसरा ख़ास।

चंद्र घंट को पूज के, लगी मोक्ष की आस ।।


सौम्य रूप में शाम्भवी, माँ दुर्गा अवतार ।

घण्टा शोभित शीश पर ,अर्ध चंद्र आकार ।।


सिंह सवारी मातु की, अस्त्र शस्त्र दस हाथ।

दर्श अलौकिक जानिए , दिव्य शक्तियाँ साथ।।


अग्नि तत्व मणिपुर सधे, योग साधना तंत्र ।

साधक मन को साधते, सप्त शती के मंत्र।।


ध्वनि घंटे की शुभ रही, करें जोर से नाद।

दूर प्रेत बाधा करे, दूर करे अवसाद ।।


कीर्ति मान सम्मान हो, साधक के घर द्वार।

रक्षा करने धर्म की, माँ आयीं संसार।।


अनिता सुधीर

Friday, October 8, 2021

माँ ब्रह्मचारिणी

मॉं ब्रह्मचारिणी के चरणों में पुष्प


कठिन तपस्या जब करी,बिल्व पत्र फल पान से।
मनोकामना पूर्ण फिर,चंद्रमौलि के  ध्यान से।।

अक्ष, कमंडल हाथ में,देवि नाम की भव्यता।
प्रेम त्याग तप साधतीं,मातु रूप में दिव्यता।।

ब्रह्मचारिणी रूप में, माँ अम्बे को पूजिए।
कर्म शक्ति अनुरूप ही,कठिन तपस्या कीजिए।।

ब्रह्मचर्य की साधना, धीरज सयंम जानिए।
सदाचार एकाग्रता, पूजन विधि ये मानिए।।

स्वाधिष्ठानी चक्र को,साधक मन जागृत करे।
विचलित चंचल मन सधे,शांत भाव झंकृत करे।।


Wednesday, October 6, 2021

कहमुक़री


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1)

तुम बिन जीवन सूना लागे

तुम से ही  साँसों के धागे

गीत बनो मेरे ज्यों मधुकर

का सखि साजन?ना सखि दिनकर ।

2)

बनूँ  तुम्हारी  ही परछाईं ,

तुम बिन होती  है कठिनाई

मेरा जीवन तुमको अर्पण 

का सखि साजन?ना सखि दर्पण।।


3)

क्लांत चित्त को शांत करे जो

पल में धमके नहीं डरे वो

मिली प्रीति की फिर से थपकी

का सखि साजन! ना सखि झपकी।।


4)

बिन उसके अब रहा न जाए

जग में ज्यों अँधियारा छाए

गुण गान करूँ उसकी महिमा

का सखि साजन! ना सखि चश्मा।।


5)


वादों का नित जाल फैलाए

उसकी बातों में फँस जाए

बड़ा सयाना कब कुछ देता

का सखि साजन, ना सखि नेता।।


6)


कहाँ मना करने पर माने

नींद खड़ी रहती सिरहाने

हर पल सुनते उसकी खरखर 

का सखि साजन, ना सखि मच्छर।।


7)


उसकी माया के बंधन में

निशिदिन बीते ध्यान मनन में

उस पर जीवन है न्यौछावर

का सखि साजन, ना सखि तरुवर।।


8)


रिक्त हृदय में विश्वास भरे

जीवन में फिर से आस भरे

तन मन की वह हरता पीड़ा

का सखि साजन, ना सखि क्रीड़ा।।


9)


हाथ पकड़ नित संबल देते

उड़ने को तब अम्बर देते 

जब भी थी जीवन की झंझा

का सखि साजन, ना सखि मंझा।।


10)


स्वर्णिम पल जीवन में लाए

झोली भर के सुख दे जाए

उससे ही सजती उर वीथिका

का सखि साजन, ना सखि जीविका।



अनिता सुधीर

Saturday, October 2, 2021

पोशाक


लघुकथा
पोशाक


चाय का कप पकड़े आरती किंकर्तव्यविमूढ़ बैठी थी। 
वेदना उसके मुख पर स्पष्ट दृष्टिगोचर थी 
राजेश! क्या हुआ आरती
पत्नी को झकझोरते हुए बोला..
आरती अखबार राजेश की ओर बढ़ाते हुए.
किस पर विश्वास करें ,सगे रिश्तेदार भी ? 
और 
पाँच माह की बच्ची क्या पोशाक पहने ,ये समाज निर्धारित कर दे.
कहते हुए
बेटी के कमरे की ओर चल दी...


अनिता सुधीर आख्या
लखनऊ

आओ कान्हा मन हल्का कर लें

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं  आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए  दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...