Saturday, July 22, 2023

दहेज निषेध



दहेज कानून -अनुचित लाभ


काल चले जब वक्र चाल में

बिना बिके दूल्हा डरता


सात वर्ष ने दाँव चला अब

घर की हँड़िया कहाँ बिके

धन की थैली प्रश्न पूछती

छल प्रपंच में कौन टिके

अदालतों से वधू पक्ष फिर

खेत दूसरों के चरता।।


चिंता लाड़ जताती सबसे

नाच रही घर के अँगना

सास ननद अब सहमी सोचें

बचा रहे चूड़ी कँगना

पुरुष घरों के छुपे खड़े हैं

उदर व्यंग्य से नित भरता।।


कोर्ट-कचहरी के नियमों को

घूँघट से दहेज पढ़ता

अपने दोष छिपाकर सारे

वर की पगड़ी पर मढ़ता

तारीखों में सबको फाँसे

तहस-नहस जीवन करता।।



अनिता सुधीर आख्या



Friday, July 21, 2023

प्रेम

गीत

प्रेम-मोह

***
प्रेम मोह में भेद कर,हे मानव विद्वान।
रेख बड़ी बारीक है,मूल तत्त्व को जान।।

त्याग समर्पण प्रेम में,भाव रखे निस्वार्थ।
स्वार्थ प्रेम में मोह है,समझें यही यथार्थ।।
पुत्र मोह धृतराष्ट्र सम,होता गरल समान
रेख बड़ी बारीक है,मूल तत्व को जान।।

प्रेम मोह को साथ रख,करें उचित व्यवहार।
सीमा में रख मोह को ,यही प्रेम आधार।।
हरिश्चंद्र के प्रेम का,दिव्य रूप पहचान।
रेख बड़ी बारीक है,मूल तत्व को जान।।

शत्रु मनुज के पाँच ये,काम क्रोध अरु लोभ।
उलझे माया मोह जो,मन में रहे विक्षोभ।।
उचित समन्वय में रहे,जीवन का उत्थान
रेख बड़ी बारीक है,मूल तत्व को जान।।

अनिता सुधीर आख्या


Thursday, July 20, 2023

महंगाई


 नवगीत

*महँगाई*



देख बढ़ी महँगाई

श्वास उधारी में फँसती


सपने महँगे होते 

जब घर में आटा गीला

कैसे चने भुनाएँ

जब चूल्हा जलता सीला

भार झोपड़ी सहकर

फिर गड्ढों में जा धँसती।

देख बढ़ी महँगाई

श्वास उधारी में फँसती।।


थैले भर रुपयों  में

मुट्ठी भर सब्जी आती

लाल टमाटर हुलसे

जब थाली सूखी खाती

पेट पीठ अब चिपके

दाने को भूख तरसती।

देख बढ़ी महँगाई

श्वास उधारी में फँसती।।


नया कलेवर पहने

नित छज्जे चढ़ती जाती

ताक धिना-धिन करके

नए-नए नृत्य दिखाती

बढ़ा जेब पर बोझा

दिल्ली निर्धन पर हँसती।

देख बढ़ी महँगाई

श्वास उधारी में फँसती।।


अनिता सुधीर आख्या




Wednesday, July 19, 2023

एकता


 चित्र गूगल से साभार

कुंडलियां

सपना कुर्सी का लिए,चलें विपक्षी चाल।

बैठक में मतभेद रख,रँगते अपनी खाल।।

रँगते अपनी खाल,लिए भारत का ठेका।

पाने मोटा माल,दिखाते फिर से एका।।

देता विगत प्रमाण,कहाँ कब कोई अपना।

खिँचती है जब टाँग,टूटता प्यारा सपना।।



अनिता सुधीर आख्या


Monday, July 17, 2023

विपदा

विपदा

नवगीत

विपदा जब द्वारे 
नहीं बिखरना

जीवन ने खेले
खेल निराले
जब जीत हार में 
पग में छाले
फिर पल ने बोला
सदा निखरना ।।

शतरंज बिछी है
घोड़ा ढैया
फिर पार लगाता
प्यादा नैया
तब कहें गोटियाँ
नहीं सिहरना।।

जीवन में दुख की
धूप सताती
सुख छत्र लिए फिर
छाया आती
विश्वास कहे अब
नहीं भटकना।।

अनिता सुधीर

Thursday, July 13, 2023

आधुनिकता

नवगीत

आधुनिकता

फुनगी पर जो
बैठे नंद।
नव पीढ़ी के
गाते छंद।।

व्यथा नींव की
सहती मोच
दीवारों पर
चिपकी सोच
अक्ल हुई अब
डिब्बा बंद।।

ऊँचे तेवर 
थोथे लोग
झूम रहे तन
मदिरा भोग
उलझे धागे
जीवन फंद।।

चढ़ा मुलम्मा
छोड़े रंग
बेढंगी ने 
जीती जंग
आजादी की
मचती द्वंद्व।।

मर्यादा की
बहकी चाल
लज्जा कहती
अपना हाल
आभूषण अब 
पहनें चंद।।

अनिता सुधीर आख्या

Saturday, July 8, 2023

बरसात

उल्लाला छन्द आधारित गीतिका
समान्त   'आत'
पदांत      'में'
**

हँसे खेत खलिहान सब,इस मौसम बरसात में।
पाकर प्रेम फुहार को,भीगे भाव प्रपात में।।

चूल्हा सीला देखता,कब उसमें भी आग हो
जब निर्धन की झोपड़ी,टप-टप टपके रात में।।

बसी गृहस्थी कोसती,ऋतु भर की अति वृष्टि को
मनुज कमाई डूबती, मौसम के आघात में।।

सुन ध्वनि दादुर मोर की,धँसी सड़क यह सोचती।
दुर्घटना कब तक बचे, सुख दुख के आयात में।।

नित पानी में तैरता,दावा क्षेत्र विकास का
बंद पड़ी हैं नालियाँ, सरकारी उत्पात में।।

वृक्षारोपण अब करें, रोकें नद्य जमाव को।
पूरी हो परियोजना, देरी क्यों हो बात में।।

क्लांत नीतियाँ हो व्यथित,समाधान को ढूँढ़तीं
पावस कब लेकर चले, जीवन सुखद प्रभात में।।

अनिता सुधीर आख्या

नशा मुक्त भारत

नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान  नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में  परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...