Tuesday, December 31, 2019




नव वर्ष का  प्रारंभ
गणेश वंदना के साथ

आधार चामर छन्द  23 मात्रा,15 वर्ण
गुरू लघु×7+गुरू
**
रिद्धि सिद्धि साथ ले,गणेश जी पधारिये,
ग्रंथ हाथ में धरे ,विधान को विचारिये।
देव हो विराजमान ,आसनी बिछी हुई,
थाल है सजा हुआ कि भोग तो लगाइये।

प्रार्थना कृपा निधान, कष्ट का निदान हो,
भक्ति भाव हो भरा कि ज्ञान ही प्रधान हो ।
मूल तत्व हो यही समाज में समानता,
हे दयानिधे! दया ,सुकर्म का बखान हो ।

ज्ञान दीजिये प्रभू अहं न शेष हो हिये
त्याग प्रेम रूप रत्न कर्म में भरा  रहे।
नाम आपका सदा विवेक से जपा करें,
आपका कृपालु हस्त शीश पे सदा रहे।


अनिता सुधीर

Monday, December 30, 2019


बीता साल
छन्द मुक्त
***
बीता साल
बीता ,पर
बीतने के लिए नहीं बीता!
चलता रहा ,
लड़खड़ाता  ,गिरता ,संभलता
कभी सही कभी गलत।
पर
ठहरा नहीं
ठिठका नहीं
डरा नहीं !
कभी शून्यता में अटका नहीं।
भटकाव लिए भटका नही
सहता रहा वार
सामने ,कभी पीछे से
रुका नहीं सहमा  नही
बीता साल बस चलता रहा ।
दुश्मन के घर तक गया ।
प्रचंड आंधी चली
तिनका तिनका सब बिखर  गये ।
लड़ता रहा अधिकार के लिए
धारा  से लड़ा
कुछ डरे कुछ डराये।
 बीता साल मंदिर गया
निर्णय लेता रहा।
बीता साल
चलता  रहा ,दौड़ता रहा !
इस  दौड़ने में कुछ धीरे धीरे
सुलगता रहा
और जाते जाते  जलता रहा ।
आने वाला साल
भी चलता रहे ,दौड़ता रहे ,
सड़ा  गला हटाना है
शिखर तक जाना है  ।


अनिता सुधीर








Saturday, December 28, 2019

गीतिका


रीतियाँ नश्वर जगत की यूँ निभाना चाहिए ,
चार दिन की ज़िंदगी का ढंग आना चाहिए ।

राख से पहले यहाँ क्यों हो रहा जीवन धुआँ ,
ध्यान चरणों में सदा प्रभु के लगाना चाहिए ।

देह माटी की बनी अभिमान इस पर क्यों करें ,
मोह  माया से परे जीवन बिताना चाहिए ।

ईश है कारक सदा से ,भाव कारक क्यों रखें ,
कर्म से झोली  भरें अब पुण्य पाना चाहिए ।

पाप करते जा रहे क्यों ,धर्म के धारक बनें ,
कीर्ति की शोभित पताका ही दिखाना चाहिए । 

Thursday, December 26, 2019

सूर्य ग्रहण
दोहा छन्द गीत

उत्कंठा मन में रही ,क्या है इसका राज ।
ग्रहण सूर्य पर क्यों लगे,रहस्य खुलते आज ।।

नील गगन में घूमते,कितने ग्रह चहुँ ओर ।
चक्कर सूरज के लगा,पकड़े रहते  डोर ।।
घूर्णन धरती भी करे, धुरी सूर्य को मान।
चाँद उपग्रह धरनि का,वो भी जाने ज्ञान।।
लिये चाँद को घूमती,करे धरा सब काज,
ग्रहण सूर्य पर क्यों लगे,रहस्य खुलते आज ।।

चाँद धरा सब घूमते ,अपनी अपनी राह।
धरा सूर्य के मध्य में,चाँद दिखाता चाह।।
अवसर जब ऐसा हुआ,होता लुप्त उजास।
घटना ये नभ की रहे ,सदा अमावस मास।।
सूर्य ग्रहण इसको कहें ,गिरी धरा पर गाज ।
ग्रहण सूर्य पर क्यों लगे,रहस्य खुलते आज ।।

बंद द्वार मंदिर हुये, करें स्नान अरु दान ।
आस्था की डुबकी में,भूले नहिं विज्ञान।।
फैली कितनी भ्रांतियां,जानें इसका मर्म।
खगोलीय गति पिंड की,विशेष नहिं है धर्म।
तर्क़ शक्ति से सोच के ,पालन रीति रिवाज ।।
ग्रहण सूर्य पर क्यों लगे,रहस्य खुलते आज ।।

©anita_sudhir

Wednesday, December 25, 2019



दोहावली

भावों का व्यतिरेक है ,नहीं शिल्प का  ज्ञान ।
छन्द सृजन संभव नहीं ,मैं मूरख अंजान।।

जीवन उपवन हो सजा,खिले पुष्प प्रत्येक।
घृणा द्वेष व्यतिरेक हो,प्रेम  बहे अतिरेक ।।

मातु पिता आशीष से,मन हर्षित अतिरेक।
प्रभु चरणों में ध्यान हो,पूर्ण कार्य प्रत्येक।।

बंधन जन्मों का रहे ,निभे प्रणय की रीति।
निष्ठा अरु विश्वास ही ,सफल करे ये नीति।।

प्रणयन कर ये सम्पदा ,हिय में भरा हुलास ।
विद्वजन के सामीप्य में ,मिले ज्ञान का ग्रास।।




Tuesday, December 24, 2019




नई सोच


शीत लहर का  प्रकोप चरम सीमा पर था । शासन के आदेश अनुसार सभी विद्यालय बंद हो गये थे ।बच्चों की छुट्टियाँ थी इतनी ठंड में सभी  काम निबटा  लेकर नीता  रज़ाई  में घुसी ही थी ,कि दरवाज़े  की घंटी बजी ।
इतनी ठंड में  कौन आया ,नीता बड़बड़ाते हुए उठी ।
(दरवाजे पर कालोनी के कुछ बच्चों और लड़कों को देखकर )
नीता - तुम लोग इतनी ठंड में ?
रोहन - आंटी एक रिक्वेस्ट है आपसे ,यदि कोई पुराने गर्म कपड़े ,कम्बल आदि आपके पास हो तो प्लीज़ साफ़ कर के उसे  पैक कर दीजिए ,हम लोग उसे दो तीन दिन में आकर ले जाएँगे ।
नीता - (आश्चर्य से  )तुम लोग इसका क्या करोगे ?
रोहन - (जो इन सबमें सबसे बड़ा  कक्षा  १२ का छात्र था )
आंटी  इतनी ठंड पड़ रही है,कुछ बच्चों को ठिठुरते देखा तो हम सबने ये सोचा कि इनकी  सहायता कैसे करें !
तो हम सभी ने ये तय  किया  कि सबके घर में पुराने  छोटे कपड़े होते ही हैं  वो  इकट्ठा कर इन ज़रूरतमंद लोगों को दे सकते हैं ।उनकी क्रिसमस और नए साल का  गिफ़्ट हो जाएगा  ,ठंडक से आराम और हमारी छुट्टियों का सदुपयोग भीं हो जाएगा ।
नीता - मंत्रमुग्ध सी रोहन की बात सुन कर , बेटा मैं तुम्हारे  विचारों से बहुत प्रभावित हुई हूँ ,क्या तुम लोगों ने अपने घर में बात कर ली है !
रोहन - आंटी पापा को बताया था , वो बहुत ख़ुश हुए और उन्होंने हमारी पूरी सहायता करने को कहा है ।ये सब  बाँटने में वो हमारे साथ होंगे ।
नीता - (सोचते हुए )धन्य  हैं  रोहन के माता पिता जिन्होंने इतने अच्छे संस्कार दिए । जब आज की पीढ़ी नए साल की पार्टी  में नशे में चूर  हो  डान्स में डूब जाती है तो ये विचार समाज में एक नयी सुबह ले कर आयेगा ,निश्चिन्त हूँ  जब तक ये संवेदनशीलता हमारी सोच में रहेगी हमारी संस्कृति की रक्षा सदैव रहेगी । मुस्कुराते हुए वो गर्म  कपड़े निकालने चल दी थी ::
©anita_sudhir

Monday, December 23, 2019



कुंडलियां

*गजरा**
गजरा ले लो आप ये ,सुनते थे आवाज।
रुके वहाँ कुछ सोच के,छोड़े सारे काज ।।
छोड़े सारे काज,दिखी थी कोमल कन्या ।
मुख मलिन वसन हीन,कहाँ थी इसकी जन्या।।
मन में  उठती पीर....करें  ये जीवन उजरा।
लेकर आया मोल ,.....उन्हीं हाथों से गजरा।।
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*कंगन **
असली कंगन पहन के ,महिला करती सैर ।
वहाँ लुटेरे मिल गये ....कंगन की नहि खैर ।।
कंगन की नहि खैर ,सभी देखते तमाशा ।
छीना झपटी मार,नहीं स्त्री छोड़ी आशा ।।
निकले मुख से बोल,लिये जाओ !वो नकली।
बनवा लूँगी चार ,बचाये कंगन असली ।।
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आयुर्वेद दिवस

शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग।  वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...