मुक्तक
टेढ़ी डगर पर पाँव का,अब मखमली सत्कार हो।
थी पीर वर्षों से सही, इन राह से अब प्यार हो।।
घट रिक्त जीवन का रहा, हर मोड़ पर जो प्यास थी
यह आस लेकर चल पड़ी,अब बूँद से अभिसार हो।।
अनिता सुधीर आख्या
मुक्तक गुणी जनों ने लिख दिये,कितने सुंदर तथ्य। कड़ा परिश्रम जानिये,लिखा हुआ जो कथ्य।। आहुति देते ज्ञान की,बनती एक किताब आत्मसात कर तथ्य का,...
भाव पूर्ण मुक्तक।
ReplyDeleteभावपूर्ण मुक्तक
ReplyDeleteवाह
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