Saturday, July 17, 2021

शिक्षक

शिक्षक
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दोहावली

ज्ञान आचरण दक्षता,शिक्षा का आधार।
करे समाहित श्रेष्ठता, उत्तम जीवन सार।।

शिक्षक दीपक पुंज है,ईश्वर का अवतार।
शिक्षक अपने शिष्य को,देते ज्ञान अपार।।

निर्माता हैं देश के,उन्नत करें समाज।
रखते कल की नींव ये,करें नया आगाज।।

अनगढ़ माटी के घड़े,शिक्षक देते ढाल।
मार्ग प्रदर्शक आप हैं,उन्नत करते भाल।।

पेशा उत्तम जानिए,गढ़ते मनुज चरित्र।
आशा का संचार कर,करते कर्म पवित्र।।

पथ प्रशस्त करते सदा,मन में भरें प्रकाश।
नैतिकता के पाठ से,है विस्तृत आकाश।।

परम्परा गुरु शिष्य की,रही बड़ी प्राचीन।
ध्येय सिद्धि को साधने,सदा रहे थे लीन।।

हृदय व्यथित हो देखता,शिक्षा का व्यापार।
फैल रहा इस क्षेत्र में ,कितना भ्रष्टाचार।।

अपने शिक्षक को करूँ, शत शत बार प्रणाम।
जिनके संबल से मिला,जीवन को आयाम।।

मैं शिक्षक के रूप में,श्रेष्ठ निभाऊँ धर्म।
देना ये आशीष प्रभु,समझूँ शिक्षा मर्म।।

अनिता सुधीर आख्या

Sunday, July 4, 2021

*अंतस ने अपनी पीर कही*


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*अंतस ने अपनी पीर कही*

आहत हो कर अंतस सोचे,कैसे पीर अपार लिखें।
रंग बदलते मानव के नित,कैसे क्षुद्र विकार लिखें।।

पढ़े चार अक्षर ये ज्ञानी,नित्य बखेड़ा करते जब
अपशब्दों का दौर चला है,कैसा जग व्यवहार लिखें।।

दूजे कंधे पर पग रखकर,अपनी राह बनाई जब
पूरा जीवन स्कंध कराहे,कैसे जग के वार लिखें।।

घात सहे नित पाषाणों से,उनको धीर धरे सहता 
सहन शक्ति औषधि बन पूछे,कैसे नित उपचार लिखें।।

रखे ताक पर चिंतन मंथन,कूप अहम से भरते जन
कलम तड़पती जब मेरी ये,कैसे लेखन धार लिखें।।

अनिता सुधीर आख्या

Friday, July 2, 2021

तुरपन



तुरपन

याद आती है 
माँ की वो हिदायतें
जो वो 
दिया करतीं थीं...
तुरपन
इतनी महीन करना 
दूसरी ओर दिखे न धागा..
मैं ग़लतियाँ करती रही
सुई कई बार ऊँगलियों में चुभी 
 टीस उठती रहती 
धागा दूसरी और दिखता ही रहा ...
अब 
जीवनके पन्ने पलट कर 
देखते हैं 
तो सोचते हैं 
माँ तुम्हारी आकांक्षाओं पर 
तब तुरपन
सही थी या नहीं 
पर अब माँ 
इन महीन धागों से
महीन तुरपन कर
अधरों को सी रखा है ...
माँ अब ..
दूसरों को दिखता नहीं धागा 
रिश्तों को बाँध रखा है 
सहेजने में टीस उठती है 
कुछ दिल में चुभती है 
इस सहेजने  बाँधने में
तुरपन
टूटने का देर रहता है 
पर माँ बहुत मेहनत से 
आपने जो तुरपन सिखाई थी 
उसका मान  रखना है न माँ ...

अनिता सुधीर आख्या



Thursday, June 24, 2021

नीयत



नवगीत


भोली सूरत उर खोटा

नीयत पर चढ़ नीम करेला
बींध रहा कबसे तन मन

प्रश्न निरर्थक डेरा डाले
फाँस बने हैं गरदन की
मर्यादा पर अमर बेल चढ़
घाव बढ़ाती मर्दन की
कंटक के तरुवर को सींचा
पुष्प महकता कब उपवन।।

क्षुद्र विचारों की गपशप थी
भूल गए वो भावों को
अफवाहों का बाजार गरम
शूल चुभोया पाँवो को
बिल्ली खिसियानी घूम रही
तोड़े छींका हर आँगन।।

काँव काँव के ठेके में है
भोली सूरत उर खोटा
गिरगिट लज्जा से देख रहा
नाम बड़ा दर्शन छोटा
वैचारिक अतिक्रमण का फिर
ध्वजा लिए चलता अनबन।।

अनिता सुधीर आख्या











Sunday, June 20, 2021

महर्षि पतंजलि

 

मदिरा सवैया

*महर्षि पतंजलि*


पावन भू पर जन्म लिए,मुनि भारत गौरव गान लिखे।
दर्शन योग पतंजलि का,ऋषि धातु रसायन मान लिखे।।
योग विधान प्रसिद्ध हुआ,परिभाषित सूत्र महान लिखे।।
भाष्य विवेचन सार लिखे,वह संस्कृति का अवदान लिखे।।

अष्ट प्रकार सधे तन ये,छह दर्शन में उत्थान लिखे।
औषधि वैद्य पितामह थे,तन साधन का तप ज्ञान लिखे।।
जो उपचार किए मन का,मन चंचल का वह ध्यान लिखे।
रोग विकार मिटा जग का,वह भारत की  पहचान लिखे।।

अनिता सुधीर आख्या

Thursday, June 10, 2021

सैनिक


*सैनिक*
आल्हा छन्द 

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शब्दों की सीमा सोच रही, कैसे लिख दूँ सैनिक आज।
कर्तव्यों की वेदी पर जो,पहने हैं काँटों का ताज।।

वीरों की धरती है भारत,थर थर काँपे इनसे काल।
संकट के जब बादल छाए, रक्षा करते माँ के लाल।।

रात जगी पहरेदारी में, देख रही है सोया देश।
मित्र बना कर बारूदों को,वीर सजाते फिर परिवेश।।

रिपु को धूल चटाना हो या,नागरिकों का रखना ध्यान।
विपदा कैसी भी आ जाए,हँस कर देते हैं बलिदान।।

हिमकण की ओढ़ें चादर या ,तपती बालू का शृंगार।
देश बना जब इनका प्रियतम, नित्य ध्वजा से है मनुहार।।

भू रज मस्तक की शोभा है,शौर्य समर्पण है पहचान।
फौलादी तन मन  रख सैनिक ,करते कितने कार्य महान।।


अनिता सुधीर














नशा मुक्त भारत

नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान  नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में  परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...