कुंडलिया
पिछड़े अगले खेल में, संसद में सब एक।
अगले को पिछड़ा करें, कौन विचारे नेक।।
कौन विचारे नेक, जाति की सीढ़ी चढ़ते।
नीति नियम हों एक, तभी सब आगे बढ़ते।।
आरक्षण की चोट, लाभ से क्यों सब बिछड़े।
सबको कर दो उच्च, मिटा दो सारे पिछड़े।।
अवसर सबको ही मिले, यही विचारो आज।
आगे बढ़ना नीति में, उन्नत सकल समाज।।
उन्नत सकल समाज, मिले वंचित को सुविधा।
भारत में सब एक, करें क्यों इसमें दुविधा।।
होंगें तभी स्वतंत्र, नहीं हो कोई अंतर।
चलो समय के साथ, दिला दो सबको अवसर।।
अनिता सुधीर आख्या