Thursday, January 14, 2021

मकर संक्रांति

दोहा छन्द पर आधारित
गीत 

प्रथम पर्व है वर्ष का,खत्म हुआ खर मास।
तेजोमय हों सूर्य सम,लगी देव से आस।।

संवत के पंचाग में,हिंदू तिथि आधार।
मकर राशि दिनकर चले,आये तब त्यौहार।।
दक्षिण से उत्तर चले, सूर्य देव भगवान।
पुण्य काल आराधना,करिये जप तप दान।।
बीजमंत्र है सूर्य का,मकर संक्रांति खास।
तेजोमय हों सूर्य सम..

परम्परा के पर्व में ,रहे एकता सार
माघी पोंगल लोहड़ी,मिटे दिलों के रार।।
कल्प वास की है प्रथा,उमड़ा जन सैलाब।
भारत संस्कृति श्रेष्ठतम,इसका नहीं जवाब।।
खिचड़ी पापड़ रेवड़ी,तिल गुड़ भरे मिठास।
तेजोमय हों सूर्य सम...

नई फसल अब कट रही,कृषकों का आभार।
भरा रहे धन धान्य से,सदा अन्न भंडार।।
मन पतंग बन उड़ चले ,थामे खुशियां डोर।
सकरात्मक ऊर्जा लिए,नवल सुखद हो भोर।।
ऋतु परिवर्तन जान कर,भरता मन उल्लास।
तेजोमय हों सूर्य सम....

अनिता सुधीर आख्या





3 comments:

  1. जी हार्दिक आभार

    ReplyDelete
  2. सुन्दर दोहागीत।
    मकर संक्रान्ति का हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete

नवगीत

हठी आज हठी ने ठान लिया है अपने को ही नोच नीति नियम क्यों ताखे पर रख अनुशासन का  कभी स्वाद चख मनमानी जब उड़े हवा में  घर में रहना सोच किसकी प...