Saturday, January 2, 2021
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नवगीत
हठी आज हठी ने ठान लिया है अपने को ही नोच नीति नियम क्यों ताखे पर रख अनुशासन का कभी स्वाद चख मनमानी जब उड़े हवा में घर में रहना सोच किसकी प...
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सहकर सबके पाप को,पृथ्वी आज उदास। देती वह चेतावनी,पारा चढ़े पचास।। अपने हित को साधते,वक्ष धरा का चीर। पले बढ़े जिस गोद में,उसको देते पीर।। दू...
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मुक्तक ग़मों को उठा कर चला कारवां है। बनी जिंदगी फिर धुआं ही धुआं है।। जहां में मुसाफ़िर रहे चार दिन के दिया क्यों बशर ने सदा इम्तिहां है।। अन...
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मकर संक्रांति मकर राशि में सूर्य जब, करें स्नान अरु दान। उत्सव के इस देश में, संस्कृति बड़ी महान ।। सुत की मङ्गल कामना, माता करे अपार। तिल लड...
बहुत सुन्दर दोहे।
ReplyDeleteबधाई हो आपको।
हार्दिक आभार आ0
Deleteबहुत बहुत सुन्दर |
ReplyDeleteहार्दिक आभार आ0
Deleteजाते हुए वर्ष का यथार्थवादी चित्रण
ReplyDeleteबहुत सुन्दर सृजन।
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