Thursday, July 1, 2021
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पोशाक
लघुकथा पोशाक चाय का कप पकड़े आरती किंकर्तव्यविमूढ़ बैठी थी। वेदना उसके मुख पर स्पष्ट दृष्टिगोचर थी । राजेश : क्या हुआ आरती पत्नी को झकझोरत...
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मकर संक्रांति मकर राशि में सूर्य जब, करें स्नान अरु दान। उत्सव के इस देश में, संस्कृति बड़ी महान ।। सुत की मङ्गल कामना, माता करे अपार। तिल लड...
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पनिहारन लिए भार मटकी का चलती कोस अढ़ाई पनिहारन धरा तरसती अब बूँदों को हुआ वक्ष उसका खाली जीव जगत तब व्याकुल रोया कहाँ गया उसका माली तपी ...
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मुक्तक ग़मों को उठा कर चला कारवां है। बनी जिंदगी फिर धुआं ही धुआं है।। जहां में मुसाफ़िर रहे चार दिन के दिया क्यों बशर ने सदा इम्तिहां है।। अन...
बेहतरीन
ReplyDeleteजी आभार
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