Saturday, October 16, 2021

ग़ज़ल

गमों को उठा कर चला कारवां है।
बनी जिंदगी फिर धुआं ही धुआं है।।

जहां में मुसाफ़िर रहे चार दिन के
दिया क्यों बशर ने सदा इम्तिहां है।।

शिकायत करें दर्द क्या हाकिमों से
अदालत लगा कौन सुनता यहां है।

तमाशा दिखाकर सियासत करें जो
मसीहा बने कब दिए आसमां हैं।।

तरक्की क़लम ने लिखी मुल्क की पर... 
थमे मुफ़लिसों पर सितम कब कहाँ है l


 अनिता सुधीर 




Thursday, October 14, 2021

रावण

रावण ..

अशांत मन ,असहनीय वेदना लिये 
यायावर सा भटकता रहा ,
संदेशों में कहे गूढ़ अर्थ को 
समझने की कोशिशें करता रहा ।
प्रतिवर्ष  दम्भी रावण का दहन, 
रावण का समाज में प्रतिनिधित्व
राम कौन ,जो मुझको मारे !ये प्रश्न पूछ
दस शीश रख अट्ठहास करना ,
समाज रावण और भेड़ियों से भरा
ये संदेश विचलित करते रहे ।
एक ज्वलंत प्रश्न कौंधा 
क्या लिखने वालों ने अनुसरण किया!
या संदेश अग्रसारित कर 
कर्त्तव्यों की इतिश्री कर ली ।
.....दो पुतलों को जलते देखा  जब
भीड़ के चेहरे का उत्साह,
वीडियो बनाते इन पलों को कैद करते लोग 
मेला घूमते लोगों को देख 
मन शांत हो नाच उठा ।
ये भीड़ प्रतिदिन
गरीबी ,बेरोजगारी ,अशिक्षा 
अत्याचार और न जाने कितने 
ही रावण से युद्व करती है 
जीवन की भागदौड़ में
तिल तिल कर मरती है ।
त्यौहार संस्कृति है हमारी 
त्यौहार से मिलती खुशियां सारी
प्रत्येक वर्ष रावण का दहन 
देख अपने दुख ,कष्ट भूल जाते हैं 
रावण कुम्भकरण प्रतिवर्ष जल कर 
अपनी संस्कृति से जोड़े रहते हैं
और राम बनने के प्रयास जारी ....

https://youtu.be/mcfFqNAdH80

माता सिद्धिदात्री

माता सिद्धिदात्री के चरणों में पुष्प


नंदा पर्वत तीर्थ में,सिद्धि शक्ति का वास है।
नवमी तिथि की मान्यता,कन्या पूजन खास है।।

महादेव को सिद्धियाँ, मातु कृपा से प्राप्त हैं।
अर्ध देह रख देवि का,नारीश्वर विख्यात है।।

मातु सिद्धिदात्री लिये ,दुर्गे का अवतार हैं।
आठ सिद्धियाँ पाइये,भव सागर फिर पार है।।

ज्ञान बोध की देवियां,परा शक्ति का ध्यान कर।
मिले सिद्धि सम्पूर्णता,सप्त शती का गान कर।।

हवन कुंड की अग्नि में,मिटते सभी विकार हों।
पूजन  सार्थक फिर तभी,अंतस का श्रृंगार हो।।


अनिता सुधीर आख्या

Wednesday, October 13, 2021

माँ महागौरी

माता महागौरी के चरणों में पुष्प



अष्टम तिथि की दिव्यता,पूज्य शिवा में ध्यान हो।
मातु महागौरी सदा,भक्तों का कल्याण हो।।

जन्म हिमावन के यहाँ, मातु पार्वती ने लिया।
शंकर हों पति रूप में,बाल काल से तप किया।।

श्वेत वर्ण है मातु का,उपमा श्वेतांबरधरा ।
चतुर्भजी दुखहारिणी,माँ का अब है आसरा ।।

पूजन गौरी का करे,शांति हृदय में व्याप्त हो।
करें पाप का नाश फिर,शक्ति अलौकिक प्राप्त हो।।

राहू की हैं स्वामिनी ,दूर करें इस दोष को।
मातु वृषारूढ़ा भरें,सभी भक्त के कोष को।।

Tuesday, October 12, 2021

लोहिया



 राम मनोहर लोहिया


देश के चिंतन में

लोहिया जीवित हैं आज।

पक्षधर शुचिता के 

कर्म के मंथन में आज।।


कुछ लोग मरा कब करते हैं, सोच अमर करती है नाम। 

राम मनोहर समाजवाद को, जन-जन करता नित्य प्रणाम। 


राष्ट्रवाद के प्रखर प्रणेता, नित्य सुधारें देश समाज। 

कर्म अनुसरण कर कितनों ने, अब भी पहना सिर पर ताज।।


आजादी के आंदोलन में,योगदान भूला है कौन। 

जनमानस में भेद मिटाने, कर्म करें वह रहकर मौन।। 


मतभेद जवाहर से होता, सप्त क्रांति की उनकी नीति।

ऐसा जग बन जाए फिर जिसमें पलती पल-पल प्रीति।।


राजनीति की शुचिता में वो, अपनों का भी करें विरोध। 

अनगिन स्मारक आज खड़े हो, नित्य कराते सबको बोध।। 


माँ कालरात्रि

 माता कालरात्रि के चरणों में पुष्प

***

माँ कालरात्रि की अर्चना


कालरात्रि की अर्चना,सप्तम तिथि को कीजिए।

काल विनाशक कालिका,शुभंकरी को पूजिए।।


रक्त बीज संहार जब,जन्म हजारों रक्त का।

दानव का संहार कर,कष्ट हरा फिर भक्त का।।


तीन नेत्र की स्वामिनी,रूप धरे विकराल हैं।

तांडव मुद्रा देख के,दूर भागता काल है ।।


चतुर्भुजी के हाथ में,कांटा और कटार है।

गर्दभ वाहन साथ ले,करें असुर संहार है।।


रोग दोष से मुक्त कर,करें शत्रु का नाश है।

ग्रह बाधा को दूर कर,जग में भरा प्रकाश है।।


द्वार सिद्धियों के खुलें,साधक मन सहस्रार में।

शीर्ष चक्र की चेतना,है दैहिक आधार में।।


अनिता सुधीर

कात्यायनी माता

कात्यायनी माता
***

कात्यायन ऋषि की सुता,अम्बे का अवतार हैं।
छठे दिवस कात्यायनी, वंदन बारम्बार है।।

दानव अत्याचार से,मिला धरा को त्राण था।
महिषासुर संहार से,किया जगत कल्याण था।।

पूजें सारी गोपियाँ, ब्रज देवी सम्मान में।
मुरलीधर की आस थी,मग्न कृष्ण के ध्यान में।।

चतुर्भुजी माता लिए,कमल और तलवार हैं।
वर मुद्रा में शाम्भवी, जग की पालनहार हैं।।

जाग्रत आज्ञा चक्र जो,ओज,शक्ति संचार है।
फलीभूत हैं सिद्धियाँ, महिमा अपरम्पार है।।

आओ कान्हा मन हल्का कर लें

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं  आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए  दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...