Wednesday, December 8, 2021

विवाह पंचमी

 विवाह पंचमी की शुभकामनाएं



।।१।।

उर लाज भरे पग साध चलीं, सुकुमारि सिया वरमाल लिए।

अति प्रेम भरें वर को निरखें, मुख तेज कपोल गुलाल लिए।।

शुभ सुंदर रूप लखें वधु का, जन हर्षित हैं सुर ताल लिए।।

सखि मंगलचार करें सँग में, वर पूजन का शुभ थाल लिए।।


।।२।।

अति विह्वल जान सखी कहतीं,अब लाज तजो कर माल उठाओ। 

प्रभु को लख क्यों सुध भूल रही, उनको वरमाल गले पहनाओ।।

कर पंकज नाल समान उठा, विधु मान उन्हें अब अर्घ्य चढ़ाओ।

जब चेतन-शक्ति प्रतीक मिले ,जग जीवन के अब स्वप्न सजाओ।।


अनिता सुधीर आख्या

Tuesday, December 7, 2021

महान


महान
दोहावली

मन के ही विश्वास से, पत्थर में भगवान।
कण-कण को हम पूजते,संस्कृति रही महान।।

मनुज धर्म की श्रेष्ठता, करिये कार्य महान।
राजनीति से दूर हो , रखें देश का मान ।।

देवि रूप में पूजते, फिर नारी अपमान।
कैसा ये पाखंड है ,भूले अर्थ महान।।

प्रण लघु मन में ठान के, करिए कार्य महान।
सत्य संकल्प से बने,मानव दृढ़ बलवान।।

अपने लहु की मसि बना,गाथा लिखी महान ।
अमर तिरंगा कर गए, भारत वीर जवान ।।

अनिता सुधीर


Sunday, December 5, 2021

लव जिहाद


*लव जिहाद*

चित्र गूगल से साभार

प्रेम जाल में फाँस कर

फिर तितली पर वार करें


पंखों पर जब पुष्प उगे

सूरज लेने दौड़ी थी

मस्ती ने थैले में फिर

भरी न कोई कौड़ी थी

पदचिन्हों की ताली भी

खुशियों पर अधिकार करे।।


बाज उसाँसे भर-भर कर

झूठे दाने फेंक रहा

मीन फाँस कर मुख में रख

नाम धर्म का सेंक रहा

रक्त सने मासूमों पर

शोषण को हथियार करे।।


तभी सियासी जामे ने

प्रेम गरल का रूप धरा

भीड़ तंत्र ने कुचला जो

प्रीत भाव फिर कूप गिरा

मित्र बना दीपक ही क्यों

जीवन को अंगार करे।।


अनिता सुधीर


Saturday, December 4, 2021



तोरण द्वारे पर सजे
बाजे मंगल गीत।
पावन परिणय में बँधे
साथ चले मनमीत।।

सात जन्म के प्यार को 
बाँधा तेरे साथ
रचा प्रेम अनुभूतियां
थामा प्रीतम हाथ
बंधन जन्मों का रहे
मधुरम प्रणय पुनीत
पावन परिणय में बँधे
साथ चले मनमीत।।

पीहर से पी घर चली
स्वप्न सुनहरे बाँध
मन मंदिर में साजना
मिला तुम्हारा काँध
प्रेम कवच विश्वास का
संबंधों की जीत
पावन परिणय में बँधे
साथ चले मनमीत।।

प्रेम सरिस दूजा नहीं
यही प्रणय का सार
हृदय प्रेम परिपूर्णता
सजा सकल संसार
मन कोयल सा कूकता
अंग अंग संगीत
पावन परिणय में बँधे
साथ चले मनमीत।।

अनिता सुधीर आख्या

Friday, December 3, 2021

डॉ राजेंद्र प्रसाद



डॉ राजेंद्र प्रसाद

3 दिसंबर 1884 - 28 फरवरी 1963


राष्ट्रपति भारत के

थे प्रथम बाबू राजेंद्र।

सादगी मूरत में

देश की आशा का केंद्र।।


त्याग सादगी की मूरत में,थे राजेंद्र प्रसाद महान।

नवनिर्माता भारत के थे,प्रथम राष्ट्रपति का सम्मान।


प्रतिभाशाली छात्र रहे जो,बनते शिक्षक और वकील। 

सभी मुकदमा जीतें बाबू, देते अद्भुत तर्क दलील।।


भाषाओं के ज्ञानी का था,सादा जीवन उच्च विचार। 

पहनावा साधारण सा था, सेवा व्रत जीवन आधार।।

 

नहीं व्यक्तिगत चाह रखी थी,धन-दौलत का कब था मोह। 

गांधी दर्शन का चिंतन कर,जीवन को लेते वो टोह।।


मातृभूमि की सेवा करके,सब के मुख पर दी मुस्कान। 

अर्थशास्त्र लिख खादी का,बने देश के रत्न महान।।


अनिता सुधीर आख्या


Thursday, December 2, 2021

तेल बाती को पिलाऊँ


 चित्र गूगल से साभार

काँपती लौ श्वास चाहे

तेल बाती को पिलाऊँ


कठघरे तन की सलाखें

दागती हैं रीतियों को

फिर धुँआ कैसे सँभाले

राख होती नीतियों को

तब शिखा की दीप्ति सोचे

मर्म जीवन जान पाऊँ।।


फूस की छत पूछती है

खम्भ तेरा क्या ठिकाना

छप्परों की मौज मस्ती

भरभरा कर फिर गिराना

ढाल पर जीवन डरा है

अग्नि से तृण को बचाऊँ।


सुर लहरियाँ डूबतीं अब

ताल तिनके ढूँढ़तीं है

पृष्ठ थक कर रो रहे जो

लेखनी सिर फोड़ती है

व्याकरण उलझा हुआ सा

छन्द कैसे छाँट लाऊँ।।


Wednesday, December 1, 2021

महर्षि पतंजलि



चित्र गूगल से साभार
*मदिरा सवैया*
।। १ ।।
पावन भू पर जन्म लिए,मुनि भारत गौरव गान लिखे।
दर्शन योग पतंजलि का,ऋषि धातु रसायन मान लिखे।।
योग विधान प्रसिद्ध हुआ,परिभाषित सूत्र महान लिखे।।
भाष्य विवेचन सार लिखे,वह संस्कृति का अवदान लिखे।।
।।२।।
अष्ट प्रकार सधे तन ये,छह दर्शन में उत्थान लिखे।
औषधि वैद्य पितामह थे,तन साधन का तप ज्ञान लिखे।।
जो उपचार किए मन का,मन चंचल का वह ध्यान लिखे।
रोग विकार मिटा जग का,वह भारत की  पहचान लिखे।।

अनिता सुधीर आख्या

नशा मुक्त भारत

नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान  नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में  परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...