विवाह पंचमी की शुभकामनाएं
।।१।।
उर लाज भरे पग साध चलीं, सुकुमारि सिया वरमाल लिए।
अति प्रेम भरें वर को निरखें, मुख तेज कपोल गुलाल लिए।।
शुभ सुंदर रूप लखें वधु का, जन हर्षित हैं सुर ताल लिए।।
सखि मंगलचार करें सँग में, वर पूजन का शुभ थाल लिए।।
।।२।।
अति विह्वल जान सखी कहतीं,अब लाज तजो कर माल उठाओ।
प्रभु को लख क्यों सुध भूल रही, उनको वरमाल गले पहनाओ।।
कर पंकज नाल समान उठा, विधु मान उन्हें अब अर्घ्य चढ़ाओ।
जब चेतन-शक्ति प्रतीक मिले ,जग जीवन के अब स्वप्न सजाओ।।