Monday, January 13, 2020

जीवन दर्शन
कुंडलिया
सिंहावलोकन विधा में प्रयास

आधा बरतन है भरा ,या आधा है रिक्त।
रिक्त देख मन रिक्त हो ,सिक्त देख मन सिक्त ।
सिक्त देख मन सिक्त ,करें विचार हम जैसे
जैसे होंगें भाव ,सदा फल होंगे वैसे ।
वैसे  हो अब कर्म ,नहीं हो कोई बाधा ।
बाधा होगी पार ,भरेगा  बरतन आधा ।

यात्रा जीवन की चली ,मिले मात्र दिन चार ।
'चार लोग 'के फेर में,रार मची थी रार ।
रार मची थी रार,वही मिलता जो बोये ।
बोये पेड़ बबूल,कहाँ से अमिया होये।
होये जग में प्रीत,बढ़े खुशियों की मात्रा ।
मात्रा जीवन सार,समझ कर पूरी यात्रा ।

स्वरचित
अनिता सुधीर

13 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 14
    जनवरी 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  3. वाह बेहतरीन सृजन।

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  4. सारगर्भित गहन भाव.लिये बहुत अच्छी कुंडलियाँ
    अनीता जी हिंदी साहित्य की इन विधाओं की धरोहर को भावी पीढी भी आत्मसात कर पाये बहुत सराहनीय प्रयास है।
    मेरी शुभकामनाएँ।

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    1. आ0 आआपके स्नेहिल शुभकामना के लिए हृदयतल से आभारी हूँ

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  5. लाजवाब कुण्डलियाँ....
    वाह!!!

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