रूह पर जमी बर्फ पिघला देती है..
तुम्हारे हाथों की वो प्यार भरी थपथपाहट
सारे गिले शिकवे मिटा देती है..
शायद ये जानते हो तुम
जानते हो न तुम..
फिर क्यों समेटे रहते हो अपने गर्म हाथ तुम..
लघुकथा पोशाक चाय का कप पकड़े आरती किंकर्तव्यविमूढ़ बैठी थी। वेदना उसके मुख पर स्पष्ट दृष्टिगोचर थी । राजेश : क्या हुआ आरती पत्नी को झकझोरत...
बहुत भावपूर्ण एवं हृदयस्पर्शी 💐💐
ReplyDeleteऐसी बात कही जो दिल को छू गई।
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