Tuesday, February 11, 2020

रुझान

पंक मध्य अब कमल नहिं,साफ हुआ अब हाथ
मुफ्त नीर विद्युत चला ,लेकर सबको साथ ।

2 comments:

  1. सबको मुफ़्त का माल चाहिए बस....

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी सत्य कथन
      जिसे ये मुफ्त का देकर अहसान जताते हैं ,वो तो एक नागरिक के अधिकार हैं

      Delete

पोशाक

लघुकथा पोशाक चाय का कप पकड़े आरती किंकर्तव्यविमूढ़ बैठी थी।  वेदना उसके मुख पर स्पष्ट दृष्टिगोचर थी ।  राजेश : क्या हुआ आरती पत्नी को झकझोरत...