हारा जीता 'मुफ्त' में ,बना तमाशा खेल।
परिपाटी मतदान की,'बिरयानी' सँग मेल।
बिरयानी का मेल,'बाग'के होते चर्चे ।
नेताओं की जीत ,कराती कितने खर्चे ।
अपशब्दों का दौर ,किसी को 'डंडा"मारा।
हुआ 'मुफ्त'का लोभ ,तंत्र हरदम ही हारा।
अनिता सुधीर
शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग। वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...
गजब! सामायिक विषय पर सार्थक सृजन।
ReplyDeleteबहुत सुंदर।
जी सादर अभिवादन
DeleteNice
ReplyDeleteजी सादर अभिवादन
Delete