पंक मध्य अब कमल नहिं,साफ हुआ अब हाथ
मुफ्त नीर विद्युत चला ,लेकर सबको साथ ।
मुफ्त नीर विद्युत चला ,लेकर सबको साथ ।
हठी आज हठी ने ठान लिया है अपने को ही नोच नीति नियम क्यों ताखे पर रख अनुशासन का कभी स्वाद चख मनमानी जब उड़े हवा में घर में रहना सोच किसकी प...
सबको मुफ़्त का माल चाहिए बस....
ReplyDeleteजी सत्य कथन
Deleteजिसे ये मुफ्त का देकर अहसान जताते हैं ,वो तो एक नागरिक के अधिकार हैं