Sunday, December 15, 2019


धुरी

नारि धुरी परिवार की,जीवन का आधार ।
बिन उसके सूना लगे,अपना घर संसार ।।
कैसे अब ये दिन कटे,पत्नी अब नहि साथ।
बच्चों की माता बने ,लिये दायित्व माथ ।।
मासूमों को देख के,होती मन में पीर।
कैसे इनको पालती ,धरे रही तुम धीर।।
जब तक मेरे सँग रही,समझ न पाया मोल।
विधि का विधान कब टला,कड़वा सच ये बोल ।।

स्वरचित
अनिता सुधीर

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कहमुकरी दिवस की शुभकामनाएं

स्वरचित कुछ कहमुक़री कहमुक़री दिवस विशेष 1) उसके बिन जग सूना लागे उससे ही साँसों के धागे गीत बना जस मन मधुकर का सखि साजन?ना सखि दिनकर । 2) सदा...