हारा जीता 'मुफ्त' में ,बना तमाशा खेल।
परिपाटी मतदान की,'बिरयानी' सँग मेल।
बिरयानी का मेल,'बाग'के होते चर्चे ।
नेताओं की जीत ,कराती कितने खर्चे ।
अपशब्दों का दौर ,किसी को 'डंडा"मारा।
हुआ 'मुफ्त'का लोभ ,तंत्र हरदम ही हारा।
अनिता सुधीर
उर द्वारे की सांकल खनकी,धड़कन ने मधु गीत लिखा। नयनों की आँखमिचोली ने,तुमको मन का मीत लिखा।। टेढ़ी मेढ़ी राहें मिलतीं,सपनों की पगडंडी में कड़...
गजब! सामायिक विषय पर सार्थक सृजन।
ReplyDeleteबहुत सुंदर।
जी सादर अभिवादन
DeleteNice
ReplyDeleteजी सादर अभिवादन
Delete