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गजब! सामायिक विषय पर सार्थक सृजन।बहुत सुंदर।
जी सादर अभिवादन
Nice
नवगीत *बँटवारा* तुलसी चौरा व्यथित देखता श्लोक मंत्र के पहर गए बूढ़ा बरगद बैठा द्वारे टुकुर-टुकुर देखे अँगना पात-पात जब शाख बाँटते फिर रोता मा...
गजब! सामायिक विषय पर सार्थक सृजन।
ReplyDeleteबहुत सुंदर।
जी सादर अभिवादन
DeleteNice
ReplyDeleteजी सादर अभिवादन
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