हारा जीता 'मुफ्त' में ,बना तमाशा खेल।
परिपाटी मतदान की,'बिरयानी' सँग मेल।
बिरयानी का मेल,'बाग'के होते चर्चे ।
नेताओं की जीत ,कराती कितने खर्चे ।
अपशब्दों का दौर ,किसी को 'डंडा"मारा।
हुआ 'मुफ्त'का लोभ ,तंत्र हरदम ही हारा।
अनिता सुधीर
स्वरचित कुछ कहमुक़री कहमुक़री दिवस विशेष 1) उसके बिन जग सूना लागे उससे ही साँसों के धागे गीत बना जस मन मधुकर का सखि साजन?ना सखि दिनकर । 2) सदा...
गजब! सामायिक विषय पर सार्थक सृजन।
ReplyDeleteबहुत सुंदर।
जी सादर अभिवादन
DeleteNice
ReplyDeleteजी सादर अभिवादन
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