हारा जीता 'मुफ्त' में ,बना तमाशा खेल।
परिपाटी मतदान की,'बिरयानी' सँग मेल।
बिरयानी का मेल,'बाग'के होते चर्चे ।
नेताओं की जीत ,कराती कितने खर्चे ।
अपशब्दों का दौर ,किसी को 'डंडा"मारा।
हुआ 'मुफ्त'का लोभ ,तंत्र हरदम ही हारा।
अनिता सुधीर
हठी आज हठी ने ठान लिया है अपने को ही नोच नीति नियम क्यों ताखे पर रख अनुशासन का कभी स्वाद चख मनमानी जब उड़े हवा में घर में रहना सोच किसकी प...
गजब! सामायिक विषय पर सार्थक सृजन।
ReplyDeleteबहुत सुंदर।
जी सादर अभिवादन
DeleteNice
ReplyDeleteजी सादर अभिवादन
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