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बहुत सुन्दर दोहे।बधाई हो आपको।
हार्दिक आभार आ0
बहुत बहुत सुन्दर |
जाते हुए वर्ष का यथार्थवादी चित्रण
बहुत सुन्दर सृजन।
घर बनाते आजकल खोखली सी नींव पर ही घर बनाते आजकल। मौन हों संवाद पूछें क्यों डराते आजकल।। जो हृदय की वेदना जग से छुपाने में लगे, वह स्वयं की म...
बहुत सुन्दर दोहे।
ReplyDeleteबधाई हो आपको।
हार्दिक आभार आ0
Deleteबहुत बहुत सुन्दर |
ReplyDeleteहार्दिक आभार आ0
Deleteजाते हुए वर्ष का यथार्थवादी चित्रण
ReplyDeleteबहुत सुन्दर सृजन।
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