Friday, January 9, 2026

माघ


माघ के दोहे

हाड़ कॅंपाते माघ में,गृहणी है लाचार।
दुबके लोग लिहाफ में,माँगे स्वाद अपार।।

कांप कांप कर उंगलियां,बीनें बथुआ साग।
इन जोड़ों के दर्द में,लगी हुई अब आग।।

सड़कें कांपे ठंड में,जलते नहीं अलाव।
लुका छिपी कर धूप भी,करे बुरा बर्ताव।

घर में ही नित स्नान से,आए नानी याद।
कल्प वास को माघ ने,सदा रखा आबाद।।

शंका का कुहरा घना,हुए लुप्त सब कथ्य।
सच की निकले धूप जब,तभी दिखेंगे तथ्य।।


अनिता सुधीर आख्या 

Wednesday, November 19, 2025

कुंडलियां दिवस की बधाई

कुंडलिया दिवस की बधाई 

ईश्वर

अंतर्यामी ईश में,निहित अखिल ब्रह्मांड।
निराकार के रूप में,अद्भुत अर्थ प्रकांड ।।
अद्भुत अर्थ प्रकांड,जगत के नीति नियन्ता।
पंचतत्व में व्याप्त,अटल है आदि अनंता ।।
सत्ता रही अदृश्य,अजन्मा जग का स्वामी।
सत्य चित्त आनंद,ब्रह्म है अंतर्यामी।।

ईश्वर

ईश्वर के इस रूप का,कैसे करूँ बखान।
निराकार साकार का,भेद नहीं आसान।।
भेद नहीं आसान,ईश हैं घट घट व्यापी।
कण कण में यदि वास,मूर्ति फिर रहे प्रतापी।।
मैं मूरख अंजान, सूक्ष्म कण काया नश्वर।
'शंकर' 'शिव' का भेद,बता दो मेरे ईश्वर।।

अनिता सुधीर आख्या

Saturday, November 1, 2025

प्रबोधिनी एकादशी

प्रबोधिनी एकादशी

*प्रबोधिनी एकादशी,आए कार्तिक मास।*
*कार्य मांगलिक हो रहे,छाए मन उल्लास।।*

शुक्ल पक्ष एकादश जानें।कार्तिक शुभ फलदायक मानें।।
चार मास की निद्रा लेकर।चेतन में लौटे दामोदर।।
श्लोक मंत्र से देव जगाएँ। प्रभु चरणों में शीश झुकाएँ।।
तुलसी परिणय अति पावन है।मंत्र दशाक्षरी  मनभावन है।।
भाव सुमन को उर में भरिये।विधि विधान से पूजन करिये।।
दीप धूप कर्पूर जलाएं।माधव को प्रिय भोग लगाएं।।
व्रत निर्जल जब सब जन रखते।दीन दुखी के प्रभु दुख हरते ।।
महिमा व्रत की है अति न्यारी।पुण्य प्रतापी सब नर नारी।।

*पाप मुक्त जीवन हुआ,हुआ शुद्ध आचार।*
*आराधन पूजन करे,खुले मोक्ष के द्वार।।*

अनिता सुधीर आख्या

Friday, October 31, 2025

सतीश शाह

अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

वो कहानी किस्से,यादें बुला के गए हैं।
जो हँसी देते थे,वो क्यों रुला के गए हैं।।

अनिता 

Friday, October 10, 2025

करवा चौथ

करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं 


प्रणय के राग गाने को,गगन में चाँद आता है।
अमर अहिवात जन्मों तक,सुहागन को सुनाता है।।

करे शृंगार जब नारी,कलाएँ कांति बरसातीं 
निरख कर रूप रमणी का,हृदय से मुस्कुराता है।।

सजा कर थाल करवा का,जली जब प्रीति की बाती
व्रती फिर चौथ पूजे तब,कलश भर अर्घ्य पाता है।।

दमकती दिव्यता लेकर,रही वामांगिनी निर्जल
निहारे देव को छलनी, शुभम् सौभाग्य आता है।।

अधूरी सी कहानी को,विवाहित पूर्णता देते
समाहित एक दूजे में,यही करवा  सिखाता है।।

अनिता सुधीर आख्या

Thursday, October 9, 2025

प्रीति

प्रीति का नव गीत रच दें आज गाने के लिए।
अब दिवस अठखेलियाँ कर हों सजाने के लिए।।
दौड़ कर ही वक़्त गुजरा,चाह अब विश्राम की
साथ जी लें अब पलों को चैन पाने के लिए।।

अनिता सुधीर आख्या 

Wednesday, October 1, 2025

प्रभु श्री राम का कोदंड धनुष

कोदंड धनुष

विधि लेखा का नेक कार्य ले, रघुवर वन को आए थे
मर्यादा ने मर्यादा रख, अद्भुत अस्त्र उठाए थे

धन्य-धन्य वह बाँस युगों तक, जिससे कोदंड बनाया
स्पर्श मिला प्रभु कर कमलों का,दिव्य अलौकिक कहलाया
कठिन तपस्या ऋषियों ने कर, रक्षा मंत्र समाए थे
मर्यादा ने मर्यादा रख, अद्भुत अस्त्र उठाए थे

चमत्कार कोदंड देखकर, लक्ष्य सदा भयभीत रहे
नीर जलधि का नहीं सोखिए, वरुण राम से यही कहे
सत्पुरुषों के हित साधे जब, कितने प्राण बचाए थे
मर्यादा ने मर्यादा रख, अद्भुत अस्त्र उठाए थे

कांधे सज कोदंड दंड दे, दुष्टों का संहार करे
धर्मयुद्ध में सत्य जिताकर, अभिमानी पर वार करे
तीरों ने जिस तन को बेधा, उसको अमर बनाए थे
मर्यादा ने मर्यादा रख, अद्भुत अस्त्र उठाए थे

द्वेष अहं दस शीश उठाए, फूले-फिरते यहाँ-वहाँ
धर्म सुनिश्चित करने आओ, राम छिपे तुम कहाँ-कहाँ
अब तुम
कलयुग का उद्धार करो अब, तुमनें वचन निभाए थे

 अनिता सुधीर आख्या 


माघ

माघ के दोहे हाड़ कॅंपाते माघ में,गृहणी है लाचार। दुबके लोग लिहाफ में,माँगे स्वाद अपार।। कांप कांप कर उंगलियां,बीनें बथुआ साग। इन जोड़ों के द...