Sunday, June 30, 2024
Thursday, June 20, 2024
भोर
सूर्य चमकता पर्दा डाले
सुप्त निशा के द्वार पटल पर
सूर्य चमकता पर्दा डाले
भोर खड़ी है अलसायी सी
धीरे धीरे सड़कें चलती
पूरब लेता फिर अँगड़ाई
सकल जगत की आशा पलती
एक सबेरा मन में उतरा
अब बीतेंगे दिन ये काले।।
घूँघट पट खोले भोर चली
कुछ सकुचाती इठलाती सी
कनक बटोरे अनगिन घट में
चले तुंग पर बलखाती सी
स्वर्ण रश्मियों की सौगातें
फिर पाकर झूमें मतवाले।।
ध्यान मग्न बैठे जड़ चेतन
वेद ऋचाएं नदियां सुनती
कलकल अविरल निर्मल मन की
अभिलाषाएं सपनें बुनती
केसरिया कहता अम्बर से
मिले धरा को नए उजाले।।
अनिता सुधीर आख्या
Wednesday, June 5, 2024
हार जीत
हार जीत
कुंडलियां
जीते भी हैं हार सम,लगे हार भी जीत।
लोकतंत्र अब देखता,कौन रहेगा मीत।।
कौन रहेगा मीत,सगा भी अवसर देखे।
राजनीति के रंग,बदलते कैसे लेखे।।
हुआ अचंभित देश,क्षोभ को सारे पीते।
नहीं कार्य का मोल,जाति में बॅंट कर जीते।।
अनिता सुधीर आख्या
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