Thursday, July 25, 2024
कौवा
Friday, July 12, 2024
Wednesday, July 10, 2024
दोस्ती
कुछ क्षणिकाएं
दोस्ती पर
***
छोटी सी दुनिया थी मेरी
एक मैं और एक दोस्ती तेरी ,
दोस्ती वह सच्ची थी
पल में कुट्टी ,पल में मुच्ची थी।
मैं जब भी राह भटकी
तुम हाथ मेरा थाम के
सहारा बन जाते
वर्षों बाद भी मेरी दुनिया
उतनी ही छोटी
और तुम्हारी.....?
2)
दोस्ती की नींव
के पत्थर ,
बहस करते हुए ...
मित्रता की बुनियाद
मैं संभाले हुए
तभी कांच की
छनाक आवाज
किरक चुभी थी
दीवारों में दरार
पड़ी तभी थी ।
अनिता सुधीर आख्या
Monday, July 8, 2024
चक्र
चक्र
मूलाधार
चार पंखुड़ी का कमल,रंग चक्र का लाल।
साधे मूलाधार को,ऊँचा होगा भाल।।
**स्वाधिष्ठान
श्रोणि क्षेत्र के चक्र को,कहते स्वाधिष्ठान।
रंग संतरी सूर्य का, करता ऊर्जावान।।
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मणिपुर
नाभि क्षेत्र के चक्र में,पीत रंग उल्लास।
पाएँ मणिपुर ध्यान से,बुद्धि ज्ञान विश्वास।।
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अनाहत
चक्र हृदय के मध्य में,हरित अनाहत ध्यान।
प्रेम भाव संचार से, हुआ सतो गुण गान।।
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विशुद्धि
कंठ ग्रंथि के चक्र से,होती गरल विशुद्धि।
मनोभाव को शुद्ध कर,मिली संतुलित बुद्धि।।
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आज्ञा चक्र
नयन तीसरा ज्ञान का,प्रभु का आज्ञा द्वार।
देखें अंतर्ज्योति से ,अंतस का संसार।।
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सहस्त्रार
गुरु का सहस्त्रार में,साधक करता ध्यान।
तन मन का एकीकरण,मिला मौन का ज्ञान।।
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अनिता सुधीर आख्या
Wednesday, July 3, 2024
वेदना
वेदना
स्वप्न सुनहरे धोखा देकर,जा छिपते जग गलियारों में
तभी विवश हो बैठा मानव,भटक गया उर अंधियारों में
सुख पाने की आस लगाए,लगा रहा पाखंडी चक्कर
भीडतंत्र का बन कर किस्सा,प्राण गवाए जयकारों में।।
अनिता सुधीर आख्या
माघ
माघ के दोहे हाड़ कॅंपाते माघ में,गृहणी है लाचार। दुबके लोग लिहाफ में,माँगे स्वाद अपार।। कांप कांप कर उंगलियां,बीनें बथुआ साग। इन जोड़ों के द...
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सहकर सबके पाप को,पृथ्वी आज उदास। देती वह चेतावनी,पारा चढ़े पचास।। अपने हित को साधते,वक्ष धरा का चीर। पले बढ़े जिस गोद में,उसको देते पीर।। दू...
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मुक्तक ग़मों को उठा कर चला कारवां है। बनी जिंदगी फिर धुआं ही धुआं है।। जहां में मुसाफ़िर रहे चार दिन के दिया क्यों बशर ने सदा इम्तिहां है।। अन...
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दिव्य युगेश* आल्हा छन्द आधारित मुक्तक युग निर्माता मोदी जी का,ओजपूर्ण व्यक्तित्व महान। पंक मध्य जो कमल खिला है,उसका अद्भुत है आख्यान।। दीप द...

