Monday, February 1, 2021

बजट

भानुमती का खोल पिटारा
बाहर आया जिन्न

नचा रहे हैं बड़े मदारी
नाचें छम छम लोग
तर्क पहनता नूतन चोला
कहता उत्तम योग
वायुयान में बैठ विपक्षी
आज हुए हैं खिन्न।।
बाहर आया जिन्न

दाल गलाए जनता कैसे
नायलॉन का मेल
टुकुर टुकुर वो बीमा देखे
रहे आँकड़े खेल
सोच रहे हैं अमुक फलाने
स्वप्न हुए अब छिन्न।।
बाहर आया जिन्न

अर्थ पड़ा बीमार कभी से
कबसे रहा कराह
बाजार उछलता जोरों से 
लाया नया उछाह
सत्य झूठ आपस में लड़ते
बुद्धि रखें हैं भिन्न।।
बाहर आया जिन्न

अनिता सुधीर आख्या

13 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज मंगलवार 02 फरवरी को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. अर्थ पड़ा बीमार कभी से
    कबसे रहा कराह
    बाजार उछलता जोरों से
    लाया नया उछाह
    सत्य झूठ आपस में लड़ते
    बुद्धि रखें हैं भिन्न।।

    बेहतरीन...

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  3. बहुत ही सुन्दर समसामयिक नवगीत सखी

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  4. मेरी रचना को स्थान देने के लिये हार्दिक आभार

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  5. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति!बजट को कविता का विषय बनाना बड़ी बात हौ--ब्रजेंद्रनाथ

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  6. वाह!सखी बहुत खूब कसा है आपने आना बाना।
    सुंदर सृजन।

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