Friday, March 13, 2020

सतरंगी

चोका 
***
बीते कालिमा
अब फैले लालिमा ,
आभा सिंदूरी
मृग ढूँढे कस्तूरी,
धूप गुलाबी
श्वेत हिम सजाती,
स्वर्णिम रश्मि
नीले सागर आती,
पावन धरा
 है उपवन हरा,
चूनर पीली
ओढ़ती हरियाली,
किंशुक लाली
पुरवा मतवाली ,
श्वेत चाँदनी
खिले पुष्प बैंगनी!
रूप प्रकृति
अनमोल संपत्ति
हो रक्षा ज्यों संतति।

स्वरचित
अनिता सुधीर







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