Monday, July 27, 2026

संसद का अवरोध

संसद में प्रतिदिन की खटपट।
ऊँट बदलता प्रतिक्षण करवट।।

माननीय की देख रहे हठ।
विषय निरर्थक से भरते घट।।

संविधान को लिए हाथ में 
मर्यादा का तोड़ रहे तट।।

लोकतंत्र के दम घुटने से
आहत कल की मिलती आहट।।

जनता देखे अपने नायक।
शैतानी करते ये नटखट।।

अनिता सुधीर आख्या 










Thursday, July 23, 2026

छात्र आंदोलन जंतर मंतर


युवा शक्तियाँ राष्ट्र संपदा,ये मानें।
भ्रमित खड़ी अवसाद लिए क्यों,ये जानें।।
सही अर्थ क्या आंदोलन का,पहचानें।
पहुँच रहे हैं ऐरे ग़ैरे,भड़काने।।

सेंक रहे सब गर्म तवे पर,दो रोटी।
उजले कपड़े नीयत रखते,जब खोटी।।
समाधान में चिकनी चमड़ी,रख मोटी।।
राजनीति की चौसर खेले,नित गोटी।।

कर के तर्क कुतर्क सभी अब,उकसाएँ।
दोष तंत्र के मिल कर ढूँढ़ें, हल पाएँ।।
छात्र युवा की यदि चिंता है,सुलझाएँ।
युवा शक्ति से देश सुरक्षित,गुण गाएँ।।

अनिता सुधीर आख्या 

Tuesday, July 14, 2026

विभाजन

रेख विभाजन के लफड़े।
झेल रहा आँगन झगड़े।।

रहा पृष्ठ पर बँटवारा।
होते सपनों के चिथड़े।।

आजादी ने कीमत दी
लज्जा के उतरे कपड़े।।

सुख-दुख के सब साथी ने
मज़हब के ओढ़े मुखड़े।।

स्वर्ण विहग की पीड़ा में 
होते अंतस के टुकड़े।।


अनिता सुधीर आख्या 

Thursday, July 9, 2026

किताब



मुक्तक 


गुणी जनों ने लिख दिये,कितने सुंदर तथ्य।
कड़ा परिश्रम जानिये,लिखा हुआ जो कथ्य।।
आहुति देते ज्ञान की,बनती एक किताब 
आत्मसात कर तथ्य का,मन में हो सामर्थ्य।।


रही किताबें साथ में,बन कर उत्तम मित्र।
भरें ज्ञान भंडार ये,लिये जगत का इत्र।।
इनका महत्व जान के,पढ़िए नैतिक पाठ 
गीतामानस से सजेसुंदर जीवन चित्र।।


जीवन ऐसा ही रहा,जैसे खुली किताब।
प्रश्नों के फिर क्यों नहीं,अब तक मिले जवाब।।
अर्पण सब कुछ कर दिया,होती जीवन साँझ,
सुलझ न पायी जिंदगी,ओढ़े रही नकाब।।


पुस्तक के ही पृष्ठ में,स्मृतियाँ मीठी शेष ।
प्रेम चिन्ह संचित रखे,विस्मृत नहीँ निमेष।।
वह किताब जब भी पढ़ी,मिलते सुर्ख गुलाब,
खड़े सामने तुम हुए,रखे पुराना भेष ।।


काल आधुनिक हो गया,बात बड़ी गंभीर।
कमी समय की हो गयी ,नहीं बचा अब धीर।।
पढ़ते अधुना यंत्र से,छूते  नहीं किताब ,
समाधान अब ढूँढिये,मन में उठती पीर।।

अनिता सुधीर आख्या 

Saturday, July 4, 2026

कहमुकरी दिवस की शुभकामनाएं

स्वरचित कुछ कहमुक़री
कहमुक़री दिवस विशेष

1)
उसके बिन जग सूना लागे
उससे ही साँसों के धागे
गीत बना जस मन मधुकर
का सखि साजन?ना सखि दिनकर ।

2)

सदा बने मेरी परछाईं 
उस बिन होती है कठिनाई
मेरा जीवन उसको अर्पण 
का सखि साजन?ना सखि दर्पण।।

3)

क्लांत चित्त को शांत करे जो
पल में धमके नहीं डरे वो
मिली प्रीति की फिर से थपकी
का सखि साजन! ना सखि झपकी।।

4)

बिन उसके अब रहा न जाए
जग में ज्यों अँधियारा छाए
गान करूँ नित उसकी महिमा
का सखि साजन! ना सखि चश्मा।।

5)

वादों का नित जाल बिछाए
उसकी बातों में फँस जाए
बड़ा सयाना कब कुछ देता
का सखि साजन, ना सखि नेता।।


6)

कहाँ मना करने पर माने
नींद खड़ी रहती सिरहाने
हर पल सुनते उसकी खरखर 
का सखि साजन,ना सखि मच्छर।।

7)

उसकी माया के बंधन में
निशिदिन बीते ध्यान मनन में
उस पर जीवन है न्यौछावर
का सखि साजन, ना सखि तरुवर।।

8)


रिक्त हृदय विश्वास भरे वो
जीवन में फिर आस भरे वो
तन मन की वह हरता पीड़ा
का सखि साजन, ना सखि क्रीड़ा।।

9)

हाथ पकड़ नित संबल देते
उड़ने को तब अम्बर देते 
जब भी थी जीवन की झंझा
का सखि साजन, ना सखि मंझा।।

10)

बाहुपाश में जकड़े जाते,
स्वप्न लोक की सैर कराते।
बिन उसके सूनी है रतिया,
का सखि साजन ,ना सखि तकिया।।

अनिता सुधीर आख्या 


नशा मुक्त भारत

नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान  नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में  परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...