विश्व रंगमंच दिवस
जग के नाटक मंच का,प्रहसन लिखता कौन।
कर्मों का फल झेलता,अभिनय कर्ता मौन।।
अनिता सुधीर आख्या
शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग। वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...
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