विश्व रंगमंच दिवस
जग के नाटक मंच का,प्रहसन लिखता कौन।
कर्मों का फल झेलता,अभिनय कर्ता मौन।।
अनिता सुधीर आख्या
माघ के दोहे हाड़ कॅंपाते माघ में,गृहणी है लाचार। दुबके लोग लिहाफ में,माँगे स्वाद अपार।। कांप कांप कर उंगलियां,बीनें बथुआ साग। इन जोड़ों के द...
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