हार जीत
कुंडलियां
जीते भी हैं हार सम,लगे हार भी जीत।
लोकतंत्र अब देखता,कौन रहेगा मीत।।
कौन रहेगा मीत,सगा भी अवसर देखे।
राजनीति के रंग,बदलते कैसे लेखे।।
हुआ अचंभित देश,क्षोभ को सारे पीते।
नहीं कार्य का मोल,जाति में बॅंट कर जीते।।
अनिता सुधीर आख्या
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...
सटीक !
ReplyDeleteसादर आभार आ0
Deleteआइए चलें अपना कर्तव्य निभाएं 😊
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