Thursday, May 6, 2021

मति की क्षति

गीत

मति की क्षति के अर्थ अनेकों
विषय बड़ा है गूढ़

एक तराजू कैसे तौले
मति गति बुध्दि विवेक।
अलग रही क्षति की परिभाषा
मानव रूप अनेक।।
तीस मार खाँ सभी बने अब
मैं अज्ञानी मूढ़
मति की ...

इसकी क्षति में घर से निकले
दोनों राजा रंक
देश रसातल में जाता फिर
खूब लपेटे पंक
हवा करे काला बाजारी
तरसें बच्चे बूढ़
मति की ...

इसकी गति जब हो बलशाली
टीका हो तैयार
फिर क्षति में हो नीयत लोभी 
करे दवा व्यापार
अहम कराता दंगल बाजी
जो सत्ता आरूढ़
मति की ...

अनिता सुधीर 



















3 comments:

  1. जो होना है मति अनुसार होना है ... सच कहा है, इसकी गति सकारात्मक रहे तो अच्छा है ...

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